Padma Awards 2026:आजादी के बाद इन 10 जिलों से लोगों को पहली बार पद्म पुरस्कार, 84 जिलों का होगा प्रतिनिधित्व - Padma Awards: 10 Districts Of Winners Featuring For First Time

Padma Awards 2026:आजादी के बाद इन 10 जिलों से लोगों को पहली बार पद्म पुरस्कार, 84 जिलों का होगा प्रतिनिधित्व - Padma Awards: 10 Districts Of Winners Featuring For First Time

देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रविवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। इन पुरस्कारों के लिए देश के हर कोने से विजेताओं को चुना गया है। आजादी के बाद पहली बार दस ऐसे जिलों के लोगों के लिए पद्म पुरस्कार की घोषणा की गई है, जिनका नाम पहले कभी इस सूची में नहीं आया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।  और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

उन्होंने बताया कि सरकार ने 39 हजार से अधिक नामांकनों में से 131 का पद्म पुरस्कारों के लिए चयन किया है, जिनका मूल्यांकन कई दौर की गहन, सख्त और वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। इस प्रक्रिया में व्यापक परामर्श और जांच पड़ताल शामिल थी।  विज्ञापन विज्ञापन

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अधिकारियों ने बताया कि 2026 के पद्म पुरस्कार के लिए इस तरह चयन किया गया है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों का प्रतिनिधित्व हो सके। इनमें 10 जिले ऐसे हैं, जिनके यहां से लोगों को आजादी के बाद पहली बार पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इन जिलों में कर्नाटक का मांड्या, मध्य प्रदेश का बैतूल, महाराष्ट्र का परभणी, उत्तराखंड का बागेश्वर, तेलंगाना का रंगा रेड्डी, पश्चिम बंगाल का दक्षिण दिनाजपुर, ओडिशा का नुआपड़ा, छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा, आंध्र प्रदेश का एलुरु और राजस्थान का डीग शामिल हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पद्म पुरस्कार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के दिल तक पहुंच रहे हैं। इसमें अलप्पुझा, भोजपुर, कछार, दार्जिलिंग, गोलपाड़ा, इंफाल, जूनागढ़, कृष्णा, मोकोकचुंग, नुआपड़ा, पूर्व बर्धमान और श्रीगंगानगर जैसे जिले भी शामिल हैं।

अधिकारी ने कहा कि वरिष्ठ वाम नेता वीएस अच्युतानंदन को पद्म विभूषण और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिया जाना यह दिखाता है कि मोदी सरकार राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर नेतृत्व को सम्मान देने की नीति पर काम कर रही है। बीते 12 वर्षों में 18 से अधिक राजनीतिक दलों और 22 राज्यों के नेताओं को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं।

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उन्होंने बताया कि 'अष्टलक्ष्मी' कहे जाने वाले पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भी अभूतपूर्व सम्मान मिला है। पिछले 12 वर्षों में दिए गए कुल पद्म पुरस्कारों में से 40 प्रतिशत से अधिक इन्हीं राज्यों को मिले हैं। पुरस्कार पाने वालों में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हैं, जिनमें दलित और वंचित समुदायों से आने वाले लोग भी हैं। यह  'सबका साथ, सबका विकास' की भावना को दर्शाता है। 

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आम भारतीयों के असाधारण योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस साल के पद्म पुरस्कारों में देशभर के गुमनाम नायकों को जगह दी गई है। इस वर्ष प्रेरणादायी 19 महिलाओं को भी पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है। इनमें तेजाब हमले की पीड़िता से संगीत विदुषी बनीं और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाली मंगला कपूर और लगभग 50 वर्षों तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देने वाली नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ अर्मिडा फर्नांडिस शामिल हैं, जिन्होंने एशिया का पहला मानव दूध बैंक स्थापित किया।



 

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