Padma Shri Award 2026:हिंदी का मान बढ़ाने वाले कैलाश चंद्र पंत को राष्ट्रीय सम्मान, बोले- यह सरस्वती की कृपा - Mp News: National Honour To Kailash Chandra Pant, Who Enhanced The Prestige Of Hindi, Said – This Is The Grace

Padma Shri Award 2026:हिंदी का मान बढ़ाने वाले कैलाश चंद्र पंत को राष्ट्रीय सम्मान, बोले- यह सरस्वती की कृपा - Mp News: National Honour To Kailash Chandra Pant, Who Enhanced The Prestige Of Hindi, Said – This Is The Grace

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हिंदी साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों तक निरंतर योगदान देने वाले वरिष्ठ लेखक, पत्रकार और समाजसेवी 90 वर्षीय कैलाश चंद्र (कैलाश चंद्र पंत) को पद्मश्री सम्मान 2026 से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उन्हें साहित्यिक साधना, भाषा सेवा और सामाजिक-शैक्षणिक चेतना को सशक्त करने के लिए प्रदान किया जाएगा। उनके चयन को मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि समूचे हिंदी साहित्य जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।  पद्मश्री के लिए चयन पर कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि इतने प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। यह सरस्वती की कृपा है। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

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1936 में महू, इंदौर में हुआ जन्म 
पंत का जन्म महू, जिला इंदौर 26 अप्रैल 1936 को हुआ था। उन्होंने एमए साहित्याचार्य, साहित्य रत्न की शिक्षा प्राप्त की है। पंत ने अपने लेखन और संपादन कार्य के माध्यम से हिंदी साहित्य को केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज, संस्कृति और जनचेतना से जोड़ा। वे बीते दो दशकों से चर्चित साप्ताहिक पत्रिका 'जनधर्म' का सफल प्रकाशन कर रहे हैं, जिसने वैचारिक पत्रकारिता को नई पहचान दी। इसके साथ ही वे 'अक्षरा' मैगज़ीन के संपादक के रूप में भी साहित्यिक विमर्श को दिशा दे चुके हैं।

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पत्रकारिता, शिक्षा व संस्कृति के क्षेत्र में भी पंत का योगदान
पत्रकारिता के साथ-साथ कैलाश चंद्र पंत ने शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में संस्थागत विकास में भी अहम भूमिका निभाई है। भोपाल स्थित हिंदी भवन न्यास और कृषि भवन जैसे सांस्कृतिक-बौद्धिक केंद्रों के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने स्वध्याय विद्यापीठ, महू की स्थापना कर शिक्षा, भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रसार का कार्य किया, जिससे अनेक विद्यार्थी और शोधार्थी लाभान्वित हुए। नगर के लेख देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं। उनकी लेखनी में भाषा की सहजता, विचारों की गहराई और सामाजिक सरोकार स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया
साहित्यिक और पत्रकारिता संगोष्ठियों में वे अनेक बार मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए, जहां उन्होंने हिंदी भाषा और समकालीन विमर्श पर प्रभावशाली विचार रखे।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कैलाश चंद्र पंत ने हिंदी और भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया है। भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने विभिन्न देशों की यात्राएं कीं और विश्व हिंदी सम्मेलनों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी भाषा की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। इससे उन्हें वैश्विक साहित्यिक पहचान मिली।

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कई सम्मान से नवाजे गए
पंत को इससे पहले भी बृजलाल द्विवेदी सम्मान, साहित्य भूषण, निराला साहित्य सम्मान, संस्कृति गौरव सम्मान और हिंदी सेवी सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अलंकरण प्राप्त हो चुके हैं।
 

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