Padma Shri Award,कौन थे विश्व बंधु? जिन्हें कला के क्षेत्र असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा, जानें - who was vishwa bandhu awarded padma shri by government of india for his outstanding contributions to arts - Patna News
गणतंत्र दिवस की संध्या पर पद्मश्री से सम्मानित नामों की घोषणा कर दी गई है। इसमें बिहार के प्रसिद्ध लोकनर्तक और नृत्य गुरु विश्व बंधु को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। विश्व बंधु को पद्मश्री 2026 से स्मानित किया गया है। विश्व बंधु एक लोक नर्तक रहे। उन्होंने लुप्त हो रही नृत्य शैली को पुनर्जीवित किया और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा। विशेष रूप से उन्होंने डोमकच नृत्य को लोकप्रिय बनाया और ग्रामीण समुदाय को इसके बारे में शिक्षित किया। विश्व बंधु मूल रूप से बिहार पटना के रहने वाले थे। उन्होंने देश भर में 6 हजार से ज्यादा कार्यक्रमों में प्रदर्शन किया थआ। उन्होंने हजारों नर्तकों को प्रशिक्षित किया था। उन्होंने 95 वर्ष की आयु में दिल्ली के एक अस्पताल में 30 मार्च, 2025 को अंतिम सांस ली थी।
इप्टा से रहा नाता
विश्व बंधु इप्टा से भी जुड़े रहे और उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया। बिहार में इप्टा आंदोलन से जुड़े रहे। शुरुआती दिनों में इप्टा बैले टीम के साथी रहे। उन्होंने लोक नृत्यों के जरिए अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया। लंबे समय तक पटना इप्टा के संरक्षक रहे। उम्र की बाधा को पाटते हुए इप्टा की सरगर्मियों में सहयोग किया। इप्टा की स्थापना के साठ वर्ष पूरे होने पर बिहार इप्टा की ओर से विश्व बंधु को इप्टा हीरक जयंती सम्मान से नवाजा गया था। कालांतर में विश्व बंधु 'सुरांगन' नाम संस्था की स्थापना किए थे। संस्था के माध्यम से बिहार के लोक नृत्य को राष्ट्रीय ख्याति उन्होंने दिलाई। बिहार में लोकनृत्य के विकास और संवर्धन में अनिवर्चनीय योगदान दिया। उन्हें बिहार सरकार की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी की ओर से टैगोर अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
'नृत्य की सेवा करते रहे'
विश्व बंधु शास्त्रीय नृत्य के भी अच्छे जानकार रहे। उन्होंने बिहार के श्रमकार्य और खेतीबारी, पर्व त्योहारों के गीतों पर आधारित लोकजीवन के पदचापों को सम्मान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। सुरांगन संस्था की स्थापना कर सात दशकों तक उन्होंने सैकड़ों लोकनर्तक तैयार किए। तिल्लोत्तमा, हिरण- हिरणी, बिहार गौरव गान समेत अनेक नृत्य नाटिकाओं का उन्होंने निर्देशन किया। देश भर में उन्होंने अपने नृत्य का प्रदर्शन किया। उन्होंने लोक नृत्य शैली डोमकच को भी बढ़ावा दिया।
क्या है डोमकच?
बिहार, झारखंड और नेपाल के अलावा मिथिला के लिए भी कहा जाता है कि डोमकच एक प्रसिद्ध नृत्य शैली है। जो मुख्य रूप से विवाह उत्सव के दौरान की जाती है। ये एक सामूहिक नृत्य है, जिसमें महिला और पुरुष अर्धवृत्त बनाकर या एक दूसरे की कमर पकड़कर हास्य व्यंग्य से भरे गीतों पर नाचते हैं। ये नृत्य मुख्य रूप से शादी- ब्याह के समय खासकर जब बारात निकल जाती है, तो घर पर रुकी हुई महिलाओं के द्वारा रात भर प्रस्तुत किया जाता है। इसमें महिलाएं एक दूसरे का हाथ पकड़कर एक दूसरे से मजाक करती हैं। गाली के साथ मजाक भी होता है। नृत्य में मांदर, ढोलक, झांझ और टिमकी जैसे वाद्य यंत्रों को रखा जाता है।