Parakram Diwas 2026:पराक्रम दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? जानिए इस दिन का इतिहास और महत्व - Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2026 Parakram Diwas History Significance In Hindi
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Parakram Diwas 2026: पराक्रम दिवस भारत के उस साहस की याद दिलाता है, जिसने गुलामी की जंजीरों को चुनौती दी। यह दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस, क्रांतिकारी सोच और राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की भावना को समर्पित है। पराक्रम दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा में बसे निडर राष्ट्रवाद का उत्सव है। पराक्रम दिवस हमें यह सिखाता है कि देशभक्ति भाषणों में नहीं, आचरण में दिखनी चाहिए। नेताजी का जीवन बताता है, अगर इरादा मजबूत हो तो इतिहास बदला जा सकता है। आइए जानते हैं कि पराक्रम दिवस 2026 में कब मनाया जा रहा है? इस दिन को क्यों मनाते हैं और नेताजी सुभाष चंद्र बोस व पराक्रम दिवस का क्या नाता है?
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पराक्रम दिवस 2026 कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाया जाता है।
क्योंकि इसी दिन 1897 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था।
भारत सरकार ने वर्ष 2021 से आधिकारिक रूप से इस दिन को “पराक्रम दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की।
पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है?
पराक्रम दिवस मनाने का उद्देश्य नेताजी के उस विचार को जीवित रखना है, जिसमें आज़ादी भीख में नहीं, संघर्ष से हासिल की जाती है। विज्ञापन विज्ञापन नेताजी ने यह साबित किया कि आज़ादी केवल अहिंसा का मार्ग नहीं, बल्कि साहस, संगठन और त्याग का परिणाम भी हो सकती है। यह दिन युवाओं में देशभक्ति, आत्मसम्मान और कर्तव्यबोध जगाने के लिए मनाया जाता है।
पराक्रम दिवस का इतिहास
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे तेजस्वी और साहसी नेताओं में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी और आजाद हिंद फौज (INA) का गठन किया। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”, यह नारा केवल शब्द नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी संकल्प था। नेताजी का मानना था कि भारत की आज़ादी तभी संभव है, जब भारतीय खुद अपने भाग्य का निर्माण करें। उनका जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का जीवंत उदाहरण है।
पराक्रम दिवस का महत्व
यह दिन राष्ट्र के लिए बलिदान की भावना को मज़बूत करता है। युवाओं को आत्मनिर्भर और साहसी बनने की प्रेरणा देता है। स्वतंत्रता संग्राम के भूले-बिसरे अध्यायों को सामने लाता है। यह याद दिलाता है कि आज़ादी की कीमत कितनी बड़ी रही है। आज के समय में, जब राष्ट्र को चरित्र और साहस दोनों की जरूरत है, पराक्रम दिवस हमें कर्तव्य से समझौता न करने की सीख देता है।