सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए पीएम मोदी, जानें क्या हैं मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं - Pm Modi Joins Somnath Swabhiman Parv Explore Temple’s Historical Significance And Beliefs

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए पीएम मोदी, जानें क्या हैं मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं - Pm Modi Joins Somnath Swabhiman Parv Explore Temple’s Historical Significance And Beliefs

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Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में डमरू थामे हर-हर महादेव के नारे लगाएं और इस भव्य यात्रा का नेतृत्व किया।

विज्ञापन PM Modi Joins Somnath Swabhiman Parv Explore Temple’s Historical Significance and Beliefs 1 of 4 सोमनाथ में पीएम मोदी - फोटो : ANI/PTI Reactions

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Somnath Swabhiman Parv:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी, रविवार की सुबह सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित भव्य शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया। यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन असंख्य वीरों को नमन थी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। जानकारी के मुताबिक, इस शौर्य यात्रा की सबसे विशेष झलक रही 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक सवारी, जो भारतीय परंपरा में शक्ति, साहस और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान हाथों में भगवान शिव का डमरू थामे प्रधानमंत्री मोदी ने हर-हर महादेव के नारों के बीच यात्रा का नेतृत्व किया। पूरे वातावरण में शिव भक्ति, राष्ट्र गौरव और आत्मसम्मान की अद्भुत अनुभूति देखने को मिली। यह आयोजन 1026  में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का जलाभिषेक किया है। चूंकि सोमनाथ को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान प्राप्त है। इसलिए इससे जुड़ी कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं। आइए इससे जुड़ी कथा को जानते हैं।

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Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं PM Modi Joins Somnath Swabhiman Parv Explore Temple’s Historical Significance and Beliefs 2 of 4 सोमनाथ मंदिर - फोटो : Adobe Stock सोमनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष के श्राप से चंद्रदेव (सोम) क्षय रोग से ग्रस्त हो गए थे। अपने इस रोगमुक्ति के लिए उन्होंने इसी पावन भूमि पर देवों के देव महादेव की तपस्या की थी। चंद्रदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया और वह यहीं ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए।
 

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विज्ञापन विज्ञापन PM Modi Joins Somnath Swabhiman Parv Explore Temple’s Historical Significance and Beliefs 3 of 4 सोमनाथ मंदिर - फोटो : Adobe Stock

इसी कारण इस पवित्र धाम का नाम सोमनाथ पड़ा। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, सोमनाथ को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान प्राप्त है और यहां पूजा-पाठ करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। साथ ही बड़े से बड़ी समस्याएं भी प्रभु शीघ्र दूर करते हैं।

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4 of 4 सोमनाथ मंदिर - फोटो : instagram

यही नहीं शवि जी के नामों का स्मरण करने से मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी भूमि पर अपना देहत्याग किया था, जिससे इस स्थान का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अन्य मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग, चारों युगों में हुआ माना जाता है। इसलिए यह मंदिर की प्राचीनता और शाश्वत महत्व को दर्शाता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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