Pm Modi Patan Patola Scarf History,PM मोदी के गले में दिखी 900 साल पुरानी गुजराती विरासत, जर्मन चांसलर ने भी ओढ़ा खास स्कार्फ, जानें क्यों है अलग - pm narendra modi and german chancellor friedrich merz wear patan patola scarf know gujarati silk fabric facts - Fashion News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अहमादाबाद पहुंचे और पतंग उड़ाते नजर आए। साबरमती रिवरफ्रंट से सामने आई तस्वीरों में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फॉर्मल लुक में दिख रहे हैं। पर कपड़ों से ज्यादा ध्यान जा रहा है उनके गले में नजर आ रहे रंग- बिरंगे स्कार्फ पर, जिसका कनेक्शन गुजरात से है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब पीएम मोदी ने पाटन पटोला डिजाइन वाला स्कार्फ ओढ़ा हो। उनके लुक में कई बार इस सुंदर कपड़े की झलक देखने के लिए मिलती है। पीएम पाटन पटोला दुपट्टा इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को भी गिफ्ट कर चुके हैं।
अब सवाल यह है कि आखिर पाटन पटोला क्या है और इसमें इतना क्या खास है कि पीएम मोदी से लेकर नीता अंबानी तक, हर कोई इसको पसंद करता है। बता दें कि पाटन पटोला का इतिहास 900 साल पुराना है, जिसके बारे में जानकर आपका भी दिल खुश हो जाएगा। (फोटो साभार: इंस्टाग्राम@narendramodi, ani, ians)
पाटल पटोला क्या है?
पाटन पटोला गुजरात का फेमस कपड़ा है जिसे हाथ से बुना जाता है। गुजरात के पाटन में मुख्य रूप से इसको तैयार किया जाता है। यह इसलिए अलग है क्योंकि इसको डबल इकत तकनीक से बनाया जाता है। यह कपड़ा दोनों तरफ से एक जैसा दिखता है। गुजराती लोग हर खास मौके, त्यौहार और शादी पर पाटन पटोला पहनना पसंद करते हैं क्योंकि इसको शुभ भी माना जाता है।
पाटन पटोला नाम का मतलब जानें
इस कपड़े का पाटन पटोला नाम इसलिए है क्योंकि यह गुजरात के पाटन में तैयार होता है। माना जाता है कि यह नाम संस्कृत भाषा के 'पट्टकुल्ला' शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब होता है रेशम का कपड़ा। पटोला कपड़ा सिल्क से ही तैयार होता है और इस पर फूल, हाथी और ज्योमेट्रिकल डिजाइन बनाए जाते हैं। तभी इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है।
राजा कुमारपाल से है कनेक्शन
पटोला कपड़ा गुजरात की शान है, लेकिन इसके पीछे का क्रेडिट राजा कुमारपाल को दिया जाता है। 900 साल पहले यही राजा सोलवी समुदाय के कारीगरों को गुजरात के पाटन में लेकर आए थे। करीब 700 कारीगरों ने अपना छोड़कर इस कला पर दिन- रात मेहनत की, जिसका परिणाम यह है कि आज यह दुनिभाभर में फेमस है। राजा इस कला को बहुत पसंद करते थे और प्रसिद्ध बनाना चाहते थे। तभी वो रोजाना यही नया कपड़ा पहनकर मंदिर जाते थे।
कभी शाही लोग करते थे बहुत पसंद
कुछ कपड़े ऐसे हैं जिन्हें एक समय पर राजघराने के ही लोग पहना करते थे। पाटन पटोला भी इसमें से एक है। लेकिन धीरे-धीरे यह कला प्रसिद्ध हुई और गुजरातियों की पहली पसंद बन गई। पर आज भी पहनने वालों की तरह इसे बनाने वाले कारीगर लीमेडटे हैं। कुछ ही परिवार हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी इस कला को आगे लेकर जा रहे हैं।
कभी नहीं फिकी पड़ती इसकी चमक
पाटन पटोला कपड़ा बनाने में बहुत मेहनत लगती है। क्योंकि इस पर बने पत्ती, फूल, तोते, हाथ और ज्यामितीय पैटर्न बनाना आसान नहीं है। लेकिन एक बार यह कपड़ा खरीद लिया जाए तो सालों साल चलता है। इसकी चमक कभी कमजोर नहीं पड़ती है। तभी इस कपड़े की कीमत बहुत ज्यादा होती है। पाटन पटोला साड़ी की कीमत लाखों में होती है।
बनाने में लगता है कितना समय?
डबल-इकात बुनाई से कपड़ा जितना सुंदर बनता है, इसे तैयार करना उतना ही मुश्किल है। एक-एक पाटन पटोला साड़ी को बनाने में महीनों और सालों लग जाते हैं। समय कितना ज्यादा लगेगा ये कपड़े के साइज और डिजाइन पर निर्भर करता है।
पीएम मोदी गुजराती हैं और गुजरात की इस विरासत के लिए उनका प्यार देखकर हर गुजराती और भारतीय का दिल खुश हो जाता है।