Prayagraj :माघ मेले में संतों की पसंद बनीं करोड़ों की गाड़ियां, डिफेंडर और पोर्शे को लेकर सतुआ बाबा चर्चा में - Cars Worth Crores Became The Choice Of Saints At The Magh Mela

Prayagraj :माघ मेले में संतों की पसंद बनीं करोड़ों की गाड़ियां, डिफेंडर और पोर्शे को लेकर सतुआ बाबा चर्चा में - Cars Worth Crores Became The Choice Of Saints At The Magh Mela

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माघ मेले में आए साधु-संतों के वैभव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई संतों की पसंद करोड़ों की कार है। मेले में जगद्गुरु संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा डिफेंडर कार से पहुंचे तो वह पूरे मेले में आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। लोगों में यह चर्चा तेज है कि ध्यान, तप, योग, साधना, त्याग और जप को जीवन का आधार बनाने का संदेश देने वाले बाबा खुद लक्जरी गाड़ियों के फैन कैसे बन गए हैं। वह गाड़ियों का मोह माया क्यों नहीं छोड़ पा रहे हैं। जो बाबा एक झटके पर परिवार और सांसारिक मोह माया को छोड़ दिया वह कार, महंगा चश्मे और आलीशान लाइफ स्टाइल का मोह क्यों नहीं छोड़ पा रहे हैं।

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माघ मेले में जहां एक ओर साधना और अध्यात्म की छवि दिखाई देती है, वहीं सतुआ बाबा की महंगी गाड़ियों की मौजूदगी ने आधुनिकता और अध्यात्म का संगम कर दिया है। इसको लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। समर्थक इसे साधु की गरिमा और आशीर्वाद का प्रतीक बता रहे हैं, तो आलोचक सवाल भी उठा रहे हैं। लेकिन फिलहाल, माघ मेले में सबसे ज्यादा चर्चित नामों में सतुआ बाबा शामिल हैं। इसके साथ ही उनकी डिफेंडर और पोर्शे कार भी चर्चा में हैं।  विज्ञापन विज्ञापन

सतुआ बाबा पीठ के प्रमुख जगद्गुरु महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा अपने ठाट-बाट, काफिले और महंगी गाड़ियों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने लैंड रोवर की डिफेंडर कार के बाद अब करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक की पोर्शे कार भी सतुआ बाबा के काफिले में शामिल हो गई है। माघ मेला क्षेत्र स्थित उनके शिविर में जब पोर्शे कार पहुंची तो उसका विधि-विधान से पूजन किया गया। इसे देखने के लिए लोगों की काफी भीड़ रही। महंगी गाड़ियों के शौकीन सतुआ बाबा इसे अपने गुरु का आशीर्वाद मानते हैं। 

सतुआ बाबा बोले- गुरु के आशीर्वाद से हो रहा है सब

सतुआ बाबा ने कहा कि आशीर्वाद मेरे गुरु का है। मेरी परंपरा का है और भगवान देवी-देवताओं का है। अध्यात्म कभी गरीब नहीं रहा है। कृपा हमेशा बढ़ाती है। जब मिट्टी को ऊंचा करने से शिव का स्वरूप हो सकता है तो संसार में कोई भी प्राणी नीचा नहीं हो सकता। सभी भगवान के स्वरूप हैं। यह भी कहा कि गाड़ियों की कीमत या ब्रांड का कोई महत्व नहीं है, बल्कि महत्व उस मुकाम तक पहुंचने का है, जहां कर्तव्य निभाना होता है। उन्होंने कहा कि डिफेंडर हो या कोई और गाड़ी, हमें अपने कर्तव्य तक पहुंचने के लिए जिसका उपयोग करना पड़ेगा, मैं करता रहूंगा। 

सतुआ बाबा का काशी में है मुख्य आश्रम

काशी के मणिकर्णिका घाट पर सतुआ बाबा का स्थायी आश्रम है। इस पीठ की स्थापना साल 1803 में हुई थी। ये पीठ गुजरात के रहने वाले संत जेठा पटेल ने की थी। जेठा पटेल संत बन गए थे और काशी आकर उन्होंने जिस आश्रम की स्थापना की, उस आश्रम के मुखिया को सतुआ बाबा कहते हैं। इस आश्रम में बटुकों को वैदिक शिक्षा दी जाती है। आज उसी पीठ के मुखिया संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा हैं। 

11 साल में छोड़ा घर, 19 साल में बन गए महामंडलेश्वर

संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के साधारण ब्राह्मण परिवार से आते हैं। मात्र 11 साल की उम्र में परिवार छोड़ वो काशी आ गए। काशी में उनका जुड़ाव सतुआ बाबा से हो गया। वैष्णव संप्रदाय के निर्मोही अखाड़े से जुड़े इस पीठ के मुखिया ने संतोष दास की प्रतिभा देख उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना दिया। संतोष दास मात्र 19 साल की उम्र में महामंडलेश्वर बन गए। ये अब तक के इतिहास में सबसे कम उम्र में दी गई महामंडलेश्वर की उपाधि थी। 

किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर भी लक्जरी गाड़ियों  के हैं शौकीन


किन्नर अखाड़े के कई महामंडलेश्वरों के पास भी लाखों रुपये की गाड़ियां हैं। किसी के पास फॉर्च्यूनर, किसी के पास इनोवा और स्कॉर्पियो एन जैसी महंगी गाड़ियां देखी जा रही हैं। इनके रहने और पहनावे का स्तर भी वैभवपूर्ण माना जा रहा है।

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