Rafale Fighter Jet France Colombia India,राफेल जेट पर फ्रांस को बड़ा झटका, इस देश ने 29000 करोड़ की डील की कैंसिल, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से किया था मना! - colombia canceled rafale fighter jet deal with france refusel of transfer technology will by saab gripen - Rest of Europe News
फ्रांस को राफेल फाइटर जेट पर बहुत बड़ा झटका लगा है। उसके हाथों से करीब 29 हजार करोड़ रुपये की डील निकल गई है। ग्लोबल मार्केट में फ्रांस के लिए ये पैरों तले जमीन खिसकने जैसा है। हालांकि फ्रांस को अभी भी भारत से विशालकाय डील मिलन की उम्मीद है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री एविएशन कॉन्ट्रैक्ट फ्रांस को दे सकता है। भारत, फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है और ये बातचीत अब एडवांस स्तर में है। समाचार एजेंसी एएनआई की पिछले हफ्ते की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और फ्रांस के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपये में 114 राफेल फाइटर जेट की डील हो सकती है, जिसमें करीब 30 प्रतिशत स्वदेशीकरण होगा। लेकिन भारत से एडवांस स्तर में बातचीत होने के बावजूद राफेल पर फ्रांस को बड़ा झटका लगा है।
फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन को उम्मीद थी कि कोलंबिया से उसे राफेल फाइटर जेट के लिए बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा। कोलंबिया, अपने पुराने हो चुका इजरायली मूल के किफिर लड़ाकू विमानों का बेड़ा बदलना चाहता है। कोलंबियाई मिलिट्री अधिकारियों ने राफेल को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई थी और कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि करीब लगभग 27,000 करोड़ रुपये की डील को लेकर बातचीत करीब करीब पूरी होने वाली है। ये समझौता कागजों पर भी लगभग फाइनल हो गया था, लेकिन अब कोलंबिया ने इस डील को करने से मना कर दिया है।कोलंबिया ने राफेल लड़ाकू विमान डील से किया मना
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलंबिया की सरकार ने अब राफेल खरीदने के बजाए स्वीडन से ग्रिपेन फाइटर जेट खरीदने का फैसला किया है। कोलंबियाई सरकार ने यह कॉन्ट्रैक्ट स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर को दे दिया है। हालांकि राफेल को ठुकराने के पीछे की कोई वजह अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है। bishopstrow.com की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वीडन का ऑफर कई मामलों में खास था। स्वीडन ने कोलंबिया को लंबे समय तक इंडस्ट्रियल मदद, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कोलंबिया में लोकल असेंबली की संभावना के साथ-साथ ऑपरेशनल और मेंटेनेंस लागत में काफी कमी का प्रस्ताव दिया था। माना जा रहा है कि शायद इसी वजह से राफेल को ठुकरा दिया गया है।
आपको बता दें कि स्वीडन ने भारत को भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ साब ग्रिपेन का ऑफर दिया था। लेकिन भारत ने राफेल के साथ जाने का फैसला किया है। नवभारत टाइम्स से बात करते हुए भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर ने कहा था कि "भारत के पास अब राफेल को लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर है, मेंटिनेंस सेंटर हैं और एक इको-सिस्टम तैयार हो गया है। हालांकि भारतीय वायुसेना को जो भी विमान मिलेंगे, वो उसे स्वीकार करेगी, लेकिन राफेल के साथ अब रिश्ता बन गया है।" साब ग्रिपेन, राफेल के मुकाबले सस्ता लड़ाकू विमान है। ये राफेल और यूरोफाइटर की तुलना में हल्का और ज्यादा लचीला है। इसके अलावा इसे ऑपरेट करने में लगने वाला खर्च भी काफी कम है। बताया जाता है कि कोलंबियाई का फैसला इस एयरक्राफ्ट को घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने पर आधारित है।