Rafale Fighter Jet India France Mirage,कारगिल के हीरो मिराज से राफेल तक, फ्रांस कैसे बना भारत का सबसे विश्वसनीय पार्टनर? 25 सालों की हिचकिचाहट की कहानी - mirage to rafale fighter jet deadlocks & political hesitation how france becomes reliable partner - Rest of Europe News

Rafale Fighter Jet India France Mirage,कारगिल के हीरो मिराज से राफेल तक, फ्रांस कैसे बना भारत का सबसे विश्वसनीय पार्टनर? 25 सालों की हिचकिचाहट की कहानी - mirage to rafale fighter jet deadlocks & political hesitation how france becomes reliable partner - Rest of Europe News
नई दिल्ली/पेरिस:

नवभारत टाइम्स से बात करते हुए भारत के रिटायर्ड एयर मार्शल रवि कपूर ने माना था कि भारतीय वायुसेना, पिछले कई वर्षों से नये लड़ाकू विमानों के लिए अनुरोध सरकार को भेजती रही है। रवि कपूर, 2019 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए संघर्ष के दौरान वायुसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने NBT ऑनलाइन से कहा था कि वायुसेना 2000 के दशक से लगातार सरकार से कह रही थी कि लड़ाकू विमानों की संख्या कम होने वाली है और देश को नये विमानों की जरूरत है। लेकिन सरकारें बदलती रहीं, फाइलों का चक्कर लगता रहा, टेंडर पर टेंडर जारी होते रहे, पर वायुसेना को नये विमान नहीं मिले। 2015 में आपातकालीन हालात में फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के लिए सौदा हुआ, जिसका मिलना 2020 से शुरू हुआ था। भारतीय वायुसेना 100 से ज्यादा विमान चाहती थी और अब जाकर, 114 राफेल खरीदने के लिए सरकार तैयार हुई है।

अब अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो 2026 के आखिर तक या 2027 की शुरुआत में भारत और फ्रांस आखिरकार मेक इन इंडिया के रास्ते 114 राफेल फाइटर जेट के लिए एक सरकारी डील पर साइन करेंगे। हालांकि कई डिफेंस एक्सपर्ट कीमत को लेकर आलोचना कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस डील को भारतीय वायुसेना की जरूरत के लिए सही मान रहे हैं। नवभारत टाइम्स से बात करते हुए भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट और मिलिट्री एनालिस्ट, विजयेन्द्र के ठाकुर ने 114 राफेल को तो वायुसेना की जरूरतों के लिए बिल्कुल सही बताया, लेकिन उन्होंने ट्रांसफर टेक्नोलॉजी को लेकर शक जताया है। विजयेन्द्र के ठाकुर, मिराज फाइटर जेट पायलट रह चुके हैं।
Around 80% of 114 Rafale jets to be built in India
भारतीय वायुसेना को 25 सालों से थी लड़ाकू विमानों की तलाश
भारत और फ्रांस के बीच राफेल को लेकर डील पिछले 25 सालों के घुमावदार रास्तों, गतिरोधों और राजनीतिक हिचकिचाहट की कहानी है। कारगिल युद्ध के बाद वायुसेना ने कहा था कि उसे आधुनिक, सटीक मारक क्षमता वाला फाइटर जेट चाहिए। उस संघर्ष के दौरान मिराज-2000 भारतीय वायुसेना के लिए भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनकर उभरा था। फ्रांस ने भारत को वो दिया, जिसकी उस समय सबसे ज्यादा जरूरत थी। जैसे सटीक हमला करने क्षमता, हर मौसम में ऑपरेशन, बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज (BVR) मिसाइलें और नेटवर्क आधारित युद्ध लड़ने की क्षमता। मिराज इतना शानदार लड़ाकू विमान था कि भारतीय वायुसेना का इसपर जबरदस्त विश्वास बन गया। खास बात ये है कि मिराज को भी डसॉल्ट कंपनी ने ही बनाया है, जो राफेल बनाती है।नवभारत टाइम्स से विजयेन्द्र के ठाकुर ने कहा कि, "भारतीय वायुसेना को पता था कि आने वाले समय में मिग-21 स्क्वाड्रन को धीरे धीरे हटाना पड़ेगा। हालांकि उस वक्त तक Su-30MKI वायुसेना की सर्विस में शामिल होना शुरू हो चुका था, लेकिन ये भारी एयर डोमिनेंस फाइटर जेट है, यानि ये भारी मिसाइलों के साथ मार करता है, जैसे ब्रह्मोस। इसीलिए भारत को ऐसे हल्के फाइटर जेट की जरूरत थी, जो डॉगफाइट और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हो।" वायुसेना उस वक्त Su-30 MKI से भी ज्यादा मिराज फाइटर जेट चाहती थी। सितंबर 2000 में भारत ने पहले खरीदे गए विमानों के अलावा, दुर्घटनाओं में हुए नुकसान की भरपाई के लिए 10 और मिराज 2000 का ऑर्डर दिया। डसॉल्ट ने इस दौरान एक मौका देखा और भारत के सामने एक शानदार प्रस्ताव रखा। उसने अपग्रेडेड मिराज 2000-5 के साथ-साथ फ्रांस से असेंबली लाइन का पूरा ट्रांसफर देने की पेशकश की। डसॉल्ट ने यह ऑफर तब दिया जब वह मिराज के बाद राफेल बनाने की तरफ बढ़ रहा था।
Rafale fighter jet indian air force
वायुसेना ने इस प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा था, लेकिन जियो-पॉलिटिक्स ने दखल दिया। रूस और अमेरिका को पता था कि इस डील की क्षमता क्या होने वाली है। दि प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को भ्रष्टाचार से डर था, इसीलिए वो हिचकिचा रही थी। इसलिए तत्कालीन सरकार ने वायुसेना से ज्यादा विकल्पों के बारे में दरवाजे खोलने को कहा। और फिर मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) प्रोग्राम का जन्म हुआ। इसके तहत एक मीडियम-वेट, मल्टी-रोल फाइटर खरीदने का प्रस्ताव रखा गया, जिसका परफॉर्मेंस मिराज जैसा हो। अगस्त 2004 में भारत ने ग्लोबल फाइटर बनाने वाली कंपनियों को रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किया। 2007 में 126 एयरक्राफ्ट खरीदने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर फ्रेमवर्क के तहत भारत में बनाने के लिए एक फॉर्मल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल (RFP) जारी किया गया, जिसमें 74 और एयरक्राफ्ट का ऑप्शन भी था। 6 फाइटर जेट कंपनियां भारत को लड़ाकू विमान बेचने के लिए लाइन में थीं। राफेल, यूरोपियन यूरोफाइटर टाइफून, अमेरिकन F-16 और F/A-18 सुपर हॉर्नेट, रशियन MiG-35 और स्वीडिश ग्रिपेन। कई महीनों की टेस्टिंग के बाद राफेल और टाइफून अंतिम दावेदार बचे। भारत ने एफ-16 को खारिज कर दिया। साल 2015 में मोदी सरकार ने 36 राफेल फाइटर जेट के लिए सरकार-से-सरकार डील की घोषणा की। 2018 में IAF ने आखिरकार 114 फाइटर जेट खरीदने का प्रस्ताव रखा। लेकिन फिर निर्मला सीतारमण के नेतृत्व वाले रक्षा मंत्रालय ने IAF से वापस जाकर एक ऐसा प्रस्ताव लाने को कहा, जिसमें सिंगल और ट्विन इंजन दोनों तरह के विमान शामिल हों। यह वही नई योजना थी जिसे आखिरकार 2025 में सरकार से मंजूरी दी गई है, जिससे IAF 2018 से इंतजार करने के बाद एक प्रस्ताव पेश कर सका।और आखिरकार अब जाकर दो दशक पहले शुरू हुई एक प्रक्रिया खत्म होने वाली है। भारत और फ्रांस IAF के लिए 114 राफेल F4 फाइटर जेट खरीदने के तरीकों पर सहमत हो गए हैं, जिसकी आधिकारिक औपचारिकताएं 2026 के आखिर या 2027 की शुरुआत तक पूरी हो जाएंगी। इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसमें 18 विमान फ्लाई अवे कंडीशन में खरीदे जाएंगे और बाकी भारत में बनाए जाएंगे। जिनमें 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामान होगा, जिसे C-295 ट्रांसपोर्ट विमान की तरह ही चरणों में हासिल किया जाएगा। पोर्ट के मुताबिक, अगर यह डील 2027 की शुरुआत में कर ली जाती है तो फ्लाई अवे कंडीशन में पहले 18 विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू होगी।

दिप्रिंट के मुताबिक राफेल के लिए फाइनल असेंबली लाइन दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) नागपुर फैसिलिटी में बनेगी, जो अब फ्रेंच एविएशन कंपनी दसॉल्ट एविएशन की सब्सिडियरी है, जो फाइटर जेट बनाती है। TATA, महिंद्रा, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज लिमिटेड जैसी कई भारतीय कंपनियों के साथ-साथ 3 दर्जन से ज्यादा दूसरी कंपनियां भी राफेल प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी। TATA को पहले ही राफेल के लिए फ्यूजलेज बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल चुका है, जो इस समय विदेशी ऑर्डर के लिए होगा।

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