Rajasthan News:हाईवे किनारे शराब दुकानों को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक - Rajasthan News: Supreme Court Stays Rajasthan Hc Order On Liquor Shops

Rajasthan News:हाईवे किनारे शराब दुकानों को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक - Rajasthan News: Supreme Court Stays Rajasthan Hc Order On Liquor Shops

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सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम सीमा के भीतर राजमार्गों से 1,102 शराब की दुकानों को स्थानांतरित करने संबंधी राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाई और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर पीठ द्वारा पारित उस अंतरिम आदेश के संचालन पर रोक लगा दी, जिसमें राजस्थान में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित नगर निगम एवं शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों के भीतर आने वाली 1,102 शराब की दुकानों को हटाने/स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह अंतरिम रोक राजस्थान राज्य एवं अन्य लाइसेंस धारकों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए लगाई, जिसमें हाईकोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उक्त आदेश राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की खंडपीठ न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित द्वारा डी.बी. सिविल रिट याचिका (जनहित याचिका) संख्या 6324/2023, कन्हैयालाल सोनी एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य में पारित किया गया था।

हाईकोर्ट के निर्देश

अपने अंतरिम निर्णय में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया था कि वह राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से 500 मीटर की परिधि में स्थित सभी शराब दुकानों की पहचान कर उन्हें हटाए एवं स्थानांतरित करे, भले ही वे नगर निगम सीमा, स्थानीय स्वशासी निकायों या वैधानिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आती हों। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि नगर सीमाओं का विस्तार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों को शिथिल करने का आधार नहीं बन सकता, और राजमार्गों के समीप शराब की उपलब्धता से कथित रूप से जुड़े बढ़ते सड़क हादसों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। हाईकोर्ट ने दुर्घटना संबंधी आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सार्वजनिक सुरक्षा, लगभग 2100 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान जैसी वित्तीय चिंताओं पर वरीयता रखती है। इसी आधार पर राज्य को निश्चित समय-सीमा में सभी ऐसी दुकानों को स्थानांतरित करने तथा अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। विज्ञापन विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही
राजस्थान राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने 500 मीटर की एक कठोर और निरपेक्ष पाबंदी को पुनः लागू कर दिया है, जो कि स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद स्वयं सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी बाध्यकारी स्पष्टीकरणों के विपरीत है। राज्य ने यह तर्क भी दिया कि सुप्रीम कोर्ट के बाद के आदेश—विशेष रूप से 31 मार्च 2017, 11 जुलाई 2017 तथा 23 फरवरी 2018—में मूल निर्देशों की कठोरता को कम किया गया था, जिनके तहत:
    -    कुछ मामलों में दूरी की सीमा को घटाकर 220 मीटर किया गया, और   नगर निगम क्षेत्रों के भीतर स्थित शराब प्रतिष्ठानों को, राज्य द्वारा तथ्यों के आधार पर किए गए निर्धारण के अधीन, व्यापक निषेध से बाहर रखा गया।

यह भी कहा गया कि अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट, अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित विधि को न तो नजरअंदाज कर सकता है और न ही उसे निरस्त कर सकता है, तथा न ही शीर्ष अदालत द्वारा राज्य सरकारों को प्रदान किए गए विवेकाधिकार को सीमित कर सकता है। राजस्थान राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा उपस्थित हुए। विभिन्न शराब लाइसेंस धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी एवं श्री नवीन पहवा उपस्थित हुए। इन लाइसेंस धारकों द्वारा दायर याचिकाएं भी राज्य की याचिका के साथ सूचीबद्ध थीं और सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश
पक्षकारों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के संचालन पर रोक लगा दी, जिससे राज्य सरकार एवं प्रभावित लाइसेंस धारकों को अंतरिम राहत मिली। मामले की आगे की सुनवाई, अभिवचनों के पूर्ण होने के बाद होने की संभावना है।

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