संभल नेजा मेला,संभल नेजा मेला विवाद: कमेटी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, प्रशासन पर मेला रोकने का आरोप - sambhal neja mela dispute committee files petition in high court accuses administration of stopping the fair - Sambhal News

संभल नेजा मेला,संभल नेजा मेला विवाद: कमेटी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, प्रशासन पर मेला रोकने का आरोप - sambhal neja mela dispute committee files petition in high court accuses administration of stopping the fair - Sambhal News
सुनील मिश्रा, संभल:

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पारंपरिक नेजा मेले को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। पिछले वर्ष प्रशासनिक रोक के चलते मेला आयोजित नहीं हो सका था, लेकिन इस बार धार्मिक नगर नेजा कमेटी ने साफ कर दिया है कि वे मेले के आयोजन से पीछे हटने वाले नहीं हैं। मामला अब सीधे माननीय उच्च न्यायालय पहुंच चुका है।

धार्मिक नगर नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने बताया कि नेजा मेला सैय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्ला अलैह की याद में हजार वर्षों से भी अधिक समय से परंपरागत रूप से आयोजित होता आ रहा है। उनका आरोप है कि वर्ष 2025 में प्रशासन ने जानबूझकर साजिश के तहत इस मेले को रोक दिया।शाहिद मसूदी के अनुसार, कमेटी ने समय रहते उपजिलाधिकारी को मेले के आयोजन की लिखित सूचना दी थी, इसके बावजूद झंडा रोपण से ठीक एक दिन पहले उन्हें कोतवाली बुलाकर मेले को गैरकानूनी करार देते हुए रोक लगा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान अधिकारियों ने झंडा रोपण करने वालों को देशद्रोही तक कह दिया और बाद में उन्हें 24 घंटे के लिए नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे कोर्ट भी नहीं जा सके और मेला आयोजित नहीं हो पाया।

इस वर्ष नेजा कमेटी ने 10 दिसंबर को ही जिलाधिकारी और नगर मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र सौंप दिया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 10 मार्च को नेजा मेले की ढाल गाड़ी जाएगी, जिसके बाद मेले का आयोजन किया जाएगा।

कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए 20 तारीख को हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर दी गई है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्ष मेला न लगने से स्थानीय व्यापारियों और गरीब तबके पर गहरा आर्थिक असर पड़ा। दूर-दराज से आने वाले दुकानदारों, विशेषकर दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों की आजीविका प्रभावित हुई।

शाहिद मसूदी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म को अपने त्योहार और परंपराएं मनाने का संवैधानिक अधिकार है, और यही देश की गंगा-जमुनी तहजीब और धर्मनिरपेक्ष पहचान की असली मिसाल है।

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि इस साल संभल में नेजा मेला लगेगा या फिर एक बार फिर उस पर रोक लगाई जाएगी।

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