Shattila Ekadashi Vrat Katha: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए षटतिला एकादशी पर पढ़े ये व्रत कथा, हर पाप से मिलेगा छुटकारा
धर्म-कर्म Shattila Ekadashi Vrat Katha: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए षटतिला एकादशी पर पढ़े ये व्रत कथा, हर पाप से मिलेगा छुटकारा
Shattila Ekadashi Vrat Katha:आज यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी भी मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा का विशेष महत्व होता है.
Written byAkansha Thakur
Shattila Ekadashi Vrat Katha:आज यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी भी मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा का विशेष महत्व होता है.
Akansha Thakur 14 Jan 2026 12:30 IST
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Shattila Ekadashi Vrat Katha
Shattila Ekadashi Vrat Katha: आज यानी 14 जनवरी को षटतिला एकादशी मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में इस एकदाशी का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा, व्रत और कथा का पाठ करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में षटतिला एकादशी का व्रत आज रखा जाएगा. मान्यता है कि अगर इस दिन व्रत रखा जाए लेकिन कथा ना सुनी जाए तो व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता. आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की पावन कथा और इसके पीछे छिपे धार्मिक संदेश के बारे में.
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षटतिला एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है प्राचीन काल में एक ब्राह्मणी रहती थी. वह भगवान विष्णु की परम भक्त थी और बड़ी श्रद्धा से व्रत करती थी. भक्ति के प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया लेकिन उसमें एक कमी थी उसने कभी अन्न का दान नहीं किया था. जब भगवान विष्णु ने परीक्षा ली तो उन्होंने सोचा कि इस ब्राह्मणी ने व्रत और तपस्या से बैंकुठ में स्थान तो ले लिया है लेकिन बिना अन्न दान के इसकी तृप्ति कैसे होगी? तब भगवान ने एक भिखारी का रूप धारण किया और ब्राह्मणी के पास भिक्षा मांगने पहुंच गए.
ब्राह्मणी ने भिक्षा में भोजन देने के बजाय, मिट्टी का एक ढेला उठाकर भगवान के पात्र में डाल दिया. भगवान वह मिट्टी लेकर स्वर्ग लौट आए. कुछ समय बाद जब ब्राह्मणी की मृत्यु हुई तो वह अपने पुण्य प्रताप से स्वर्ग जा पहुंची लेकिन वहां उसे रहने के लिए एक खाली कुटिया और खाने के लिए केवल मिट्टी ही मिली. ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु से पूछा हे प्रभु मैंने जीवनभर आपकी तपस्या की फिर मुझे ये खाली कुटिया और भूख क्यों मिली? तब भगवान ने जवाब देते हुए कहा कि तुमने व्रत तो किए लेकिन किसी को अन्न दान नहीं दिया और मुझे में भी भिक्षा में मिट्टी दी थी. ब्राह्मणी ने जब अपनी भूल सुधारने का उपाय पूछा तब भगवान ने उसे षटतिला एकादशी का व्रत करने और तिल का दिन करने के लिए कहा. ब्राह्मणी ने विधि-विधान से यह व्रत किया और तिल का दान किया.
क्यों जरूरी है ये व्रत कथा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षटतिला एकादशी पर व्रत करने और कथा सुनने से संकल्प पूर्ण होता है व्यक्ति को अपने कर्मों का बोध होता है, साथ ही अहंकार, लोभ और स्वार्थ से मुक्ति मिलती है. इसीलिए कहा जाता है कि कथा के बिना षटतिला एकादशी का व्रत अधूरा है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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