Shukra Pradosh Vrat Katha: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगे सारे कष्ट

Shukra Pradosh Vrat Katha: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगे सारे कष्ट

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Shukra Pradosh Vrat Katha: साल का दूसरा प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा और इस दिन व्रत रखने वाले जातक को भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है.

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Published: January 15, 2026 5:48 PM IST email india.com By Renu Yadav email india.com twitter india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us Shukra Pradosh Vrat Katha: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगे सारे कष्ट

Shukra Pradosh Vrat Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है और इस दिन भगवान शिव की उपासना की जाती है. भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण व फलदायी माना गया है. नए साल की शुरुआत प्रदोष व्रत के साथ हुई थी और साल का दूसरा प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. यह व्रत शुक्रवार को पड़ रहा है और इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. प्रदोष व्रत का पूजन सूर्यास्त के बाद यानि प्रदोष काल में किया जाता है. कहते हैं कि प्रदोष काल में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और ऐसे में यदि उनका विधि-विधान से पूजन किया जाए तो शुभ फल प्राप्ति होती है. पूजा के बाद व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए.

शुक्र प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक गांव में एक विधवा ब्राह्मणी रहा करती थी और भिक्षा मांगकर अपना पालन-पोषण करती थी. एक बार ब्राह्मणी भिक्षा मांगकर वापस लौट रही थी तो उसने रास्ते में दो बालकों को देखा जो कि अपने परिवार से बिछड़ गए थे और वह इतने छोटे थे कि परिवार के बारे में बताने में असक्षम थे. ऐसे में ब्राह्मणी दोनों बालकों को घर ले आई और उनका पालन-पोषण करने लगी. धीरे-धीरे दोनों बालक बड़े होने लगे तब ब्राह्मणी उन्हें लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम में गई.

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ब्राह्मणी ने ऋषि शांडिल्य से कहा कि वह उन अपने तपोबल से बताएं कि आखिर ये बालक कौन हैं? ऋषि शांडिल्य ने तप के बल पर पता किया तो वह चौंक गए क्योंकि यह बालक साधारण नहीं थे बल्कि विदर्भ राज के राजकुमार हैं. गंदर्भ नरेश के आक्रमण से इनके पिता का राज-पाठ छीन गया था और बालक दर-बदर हो गए थे. इसके बाद ब्राह्मणी ने ऋषि से कहा कि कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे इन बालकों को अपने पिता और राज्य दोनों मिल जाएं. तब ऋषि शांडिलय ने उन्हें प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी.

दोनों बालकों समेत उस ब्राह्मणी ने भी विधि-विधान से प्रत्येक माह का प्रदोष किया. जिसके प्रभाव से एक दिन बड़े राजकुमार की मुलाकात अंशुमती से हुई, दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे. तब अंशुमती के पिता ने राजकुमार की सहमति से दोनों की शादी कर दी. इसके बाद दोनों राजकुमारों ने अंशुमती के पिता की मदद से गंदर्भ पर हमला किया और जीत हासिल की. जिसके बाद उन्हें अपना सिंहासन वापस मिल गया और उन्होंने अपनी मां समान गरीब ब्राह्मणी को भी राज्य में एक खास स्थान दिया, जिससे उनके भी सारे दुख खत्म हो गए. प्रदोष व्रत के प्रभाव से राजकुमारों को अपना राज-पाठ वापस मिल गया था.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें

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