Silver Shortage: चांदी गायब, भारत में चुपचाप हुआ काम, दुनिया चीन के सोने की खरीद पर ही अटकी रह गई - silver shortage something big happening quietly in india world stuck on gold purchase of china
दुनिया चीन के सोने की चाल पर नजर रखे हुए है। लेकिन, भारत में कुछ और भी बड़ा और चुपचाप हो रहा है। चांदी गायब हो रही है और ज्यादा लोगों ने अभी तक इस पर ध्यान नहीं दिया है। सीए नितिन कौशिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ये बातें कही हैं। उनके मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की ओर से सोना जमा करने की खबरें भले ही नाटकीय हों। लेकिन, बाजार हमेशा सुर्खियों पर नहीं चलते। कभी-कभी वे कारखानों, घरों और लोगों की बदलती आदतों से चलते हैं। यही सब चांदी के साथ हो रहा है।
सीए नितिन कौशिक का चांदी पर यह इनसाइट ऐसे समय आया है जब सोमवार को यह 3 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर गई। एक्सपर्ट ने बताया कि 2025 में भारत ने 5,000 टन से ज्यादा चांदी का आयात किया। यह दुनिया के सालाना उत्पादन का लगभग पांचवां हिस्सा है। यह सिर्फ खरीद-बिक्री नहीं है, बल्कि असली धातु का लेन-देन है। जब कोई एक देश इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई को सोख लेता है तो यह सट्टेबाजी नहीं है। यह एक बड़ी जरूरत को दिखाता है।
अब सिर्फ गहनों की नहीं रही बात
कौशिक के मुताबिक, अब यह सिर्फ गहनों या शादी-ब्याह की बात नहीं रही। भारत के सौर ऊर्जा पर जोर देने से चांदी एक औद्योगिक जरूरत बन गई है। खासकर पश्चिमी भारत की विशाल सोरल मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें हर दिन पैनल बनाने के लिए चांदी के पेस्ट का इस्तेमाल करती हैं। भारत में चांदी का खनन बहुत कम होता है। इसलिए, हर विस्तार, हर नई फैक्ट्री लाइन और हर नए सौर लक्ष्य का मतलब है ज्यादा आयात। दुनिया भर में सिर्फ सौर ऊर्जा ही हर साल करोड़ों औंस चांदी की खपत कर रही है। यह मांग कीमतों के बढ़ने पर कम नहीं होती।
कौशिक ने आगे कहा कि इसी के साथ घरों में भी कुछ बहुत मानवीय हो रहा है। आम बचतकर्ता को नकद रखना असुरक्षित लगता है। महंगाई पूरी तरह से कम नहीं हो रही है। वैश्विक झटकों के दौरान रुपया कमजोर महसूस होता है। सोना महंगा लगता है। चांदी सस्ती लगती है। यहीं से लोगों की आदतें बदलती हैं। छोटी छड़ें, सिक्के और सिल्वर ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) चुपचाप मध्यम वर्ग के लिए सुरक्षा का जरिया बन गए हैं। भारतीय चांदी ईटीएफ को असली चांदी का समर्थन चाहिए। हर निवेश की गई राशि वैश्विक तिजोरियों से धातु निकालकर लंबी अवधि के लिए जमा करती है। 2025 में एक समय ऐसा था जब सिर्फ ईटीएफ में एक ही महीने में करोड़ों रुपये का निवेश हुआ। यह सिर्फ बाजार की तेजी का पैसा नहीं है, यह बचत का पैसा है।
चांदी की डिमांड नहीं होगी कम
कौशिक ने कहा, 2025 के मध्य तक वैश्विक चांदी की इन्वेंट्री (भंडार) में भारी कमी आई थी। हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी नरमी आई। स्थानीय स्तर पर कमी तेजी से दिखाई देने लगी। पीक मोमेंट में भारतीय स्पॉट (हाजिर बाजार) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों से दोगुने से भी ज्यादा प्रीमियम पर कारोबार कर रही थीं। आयात शुल्क भी खरीदारों को नहीं रोक सका। यह बताता है कि मांग कीमत पर निर्भर नहीं थी, बल्कि जरूरत पर आधारित थी।
एक्सपर्ट के अनुसार, अगर हम बड़ी तस्वीर देखें तो यह और भी साफ हो जाती है। भारत 2030 तक सैकड़ों गीगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य रख रहा है। यह कोई व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि एक नीतिगत प्रतिबद्धता है। जब तक हरित ऊर्जा का विस्तार होता रहेगा, चांदी की मांग कम नहीं होगी। यह सीमित सप्लाई के लिए गहनों, निवेश और प्रौद्योगिकी के साथ प्रतिस्पर्धा करेगी। इसीलिए चांदी की चालें लहरों में आई हैं - तेज, असहज और अचानक। यह प्रचार से नहीं, बल्कि सप्लाई की कमी से प्रेरित है। जब कमी बनी रहती है तो कीमतें धीरे-धीरे नहीं बढ़तीं। वे उछलती हैं, रुकती हैं, और फिर उछलती हैं।
आखिरी में कौशिक ने कहा कि सोने को सारी सुर्खियां मिलती हैं। चांदी अपना मुश्किल काम करती है। इस समय भारत मुनाफे की तलाश में नहीं है, बल्कि जरूरी चीजों और सुरक्षा को पक्का कर रहा है। बाजार हमेशा लोगों के व्यवहार का अनुसरण करते हैं। चांदी को लेकर भारत का व्यवहार स्पष्ट रूप से बदल गया है।