Solar Wind:पृथ्वी खुद चांद पर पहुंचा रही है हवा! नई स्टडी में खुले बड़े रहस्य, जानिए कैसे हो रहा ये चमत्कार - Scientists Discovery Earths Magnetic Field Transferring Air Particles To Moon Solar Winds

Solar Wind:पृथ्वी खुद चांद पर पहुंचा रही है हवा! नई स्टडी में खुले बड़े रहस्य, जानिए कैसे हो रहा ये चमत्कार - Scientists Discovery Earths Magnetic Field Transferring Air Particles To Moon Solar Winds

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New Study On Solar Wind: वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चौंकाने वाली खोज की है जो चांद पर इंसानी बस्तियां बसाने का रास्ता साफ कर सकती है। ताजा रिसर्च के मुताबिक, पृथ्वी के वायुमंडल के कण सौर हवाओं के जरिए पिछले करोड़ों वर्षों से चांद की सतह पर जमा हो रहे हैं।

विज्ञापन scientists discovery earths magnetic field transferring air particles to moon solar winds 1 of 4 सोलर विंड को लेकर हुए नए खुलासे - फोटो : AI जनरेटेड Reactions

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चांद पर इंसानों की कॉलोनी बसाने की कल्पना दशकों से की जा रही है, लेकिन अब तक यह सपना हकीकत से काफी दूर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह चांद पर जीवन के लिए जरूरी संसाधनों की कमी रही है। न वहां तरल पानी है और न ही सांस लेने लायक वातावरण। ऐसे में किसी भी चांद में कॉलोनी बसाने के लिए सबसे पहली जरूरत सांस लेने लायक हवा की है। अब तक माना जाता था कि अगर हमें चांद पर सांस लेने लायक हवा बनानी है, तो पृथ्वी से गैसों के कण वहां ले जाने होंगे, जो कि एक बहुत ही महंगा और मुश्किल काम है। लेकिन दिसंबर 2025 में प्रकाशित एक नई रिसर्च ने इस दिशा में उम्मीद की नई किरण जगाई है। loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं scientists discovery earths magnetic field transferring air particles to moon solar winds 2 of 4 सोलर विंड बन रहा मददगार - फोटो : AI जनरेटेड चांद पर ऑक्सीजन का 'कुदरती' इंतजाम?
दिसंबर 2025 में 'कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट' जर्नल में छपी एक रिसर्च में यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। यह रिसर्च बताती है कि कुदरत ने यह काम हमारे लिए पहले से ही कर दिया है। रिसर्च टीम ने पाया कि सौर हवाएं (Solar Winds), जो अंतरिक्ष में 10 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, वे पृथ्वी के वायुमंडल से नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन जैसे कणों को उड़ाकर चांद की सतह तक पहुंचा रही हैं। विज्ञापन विज्ञापन scientists discovery earths magnetic field transferring air particles to moon solar winds 3 of 4 धरती का चुंबकीय क्षेत्र (सांकेतिक) - फोटो : AI जनरेटेड धरती का चुंबकीय क्षेत्र बना मददगार
करीब 20 साल पहले हुई एक स्टडी में कहा गया था कि धरती और चांद के बीच कणों का यह ट्रांसफर 4 अरब साल पहले ही रुक गया था। लेकिन रोचेस्टर यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर सिमुलेशन ने इस बात को गलत साबित कर दिया है। नई रिसर्च के अनुसार, पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) असल में इन कणों को चांद तक पहुंचाने में मदद करता है। चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएं चांद तक फैली हुई हैं, जो इन चार्ज्ड पार्टिकल्स को ढोकर वहां ले जाती हैं। हैरानी की बात यह है कि जीवन की शुरुआत के बाद से यह ट्रांसफर और भी बढ़ गया है और आज भी जारी है। scientists discovery earths magnetic field transferring air particles to moon solar winds 4 of 4 नमूनों से मिले सबूत - फोटो : Istock इतिहास का 'टाइम कैप्सूल' है चांद की मिट्टी
चांद की मिट्टी, जिसे 'लूनर रेगुलेथ' (Lunar Regolith) कहा जाता है, वैज्ञानिकों के लिए एक टाइम कैप्सूल की तरह है। अपोलो मिशन द्वारा लाए गए नमूनों में भी नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के अंश मिले थे।

वैज्ञानिकों की इस खोज के दो बड़े फायदे हो सकते हैं। पहला ये कि इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी का वायुमंडल कैसे विकसित हुआ और जीवन पनपने के लिए किन स्थितियों की जरूरत होती है। दूसरा, चूंकि हवा बनाने के जरूरी तत्व चांद पर पहले से मौजूद हैं, इसलिए वैज्ञानिकों को अब बस उन्हें इस्तेमाल करने का तरीका खोजना होगा।

हालांकि, चांद पर बसना अभी भी बड़ी चुनौती है क्योंकि वहां का वातावरण रेडियोएक्टिव (Radioactive) है, लेकिन यह खोज लूनर कॉलोनी के सपने को हकीकत के एक कदम और करीब ले आई है। विज्ञापन अगली फोटो गैलरी देखें

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