Stock Market Crash: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स दिन में 600 अंक से ज्यादा गिरा, निफ्टी 50 भी लुढ़का - share industry down sensex and nifty falls because global trade tensions
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को सुबह-सुबह ही बड़ी गिरावट आ गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही नीचे खुले। इसकी वजह थी दुनिया भर में व्यापार को लेकर बढ़ती चिंताएं और कुछ बड़ी कंपनियों के मिले-जुले नतीजे। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंकों की गिरावट के साथ करीब 82,900 पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 175 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 25,519 अंकों पर था। मार्केट में इस गिरावट से निवेशकों में थोड़ी घबराहट दिखी। हालांकि बाजार बंद होते-होते इसमें कुछ सुधार हुआ। अंत में सेंसेक्स 324.17 अंकों की गिरावट के साथ 83,246.18 अंक पर और निफ्टी 108.85 अंकों की गिरावट के साथ 25,585.50 अंक पर बंद हुआ।
सुबह के समय सेंसेक्स पर जिन 30 शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई उनमें ICICI बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल और सन फार्मा शामिल थे। इन कंपनियों के शेयर 1% से 3% तक गिरे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2.6% लुढ़क गए। इसकी वजह यह थी कि मुकेश अंबानी की कंपनी ने तीसरी तिमाही में 0.56% की मामूली बढ़ोतरी के साथ 18,645 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट कमाया। वहीं ICICI बैंक के शेयर करीब 3% गिर गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दिसंबर तिमाही में बैंक के नतीजों में उम्मीद से ज्यादा गिरावट आई। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में 4.02% कम रहा।
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क्या है एक्सपर्ट की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में हो रही बड़ी भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक घटनाएं बाजारों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह नहीं पता कि राष्ट्रपति ट्रंप की विघटनकारी नीतियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित करेंगी। यह देखना बाकी है कि यूरोपीय देश राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड पर लगाए गए नए टैरिफ पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
...तो और गिर जाएगा बाजार
डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि अगर ट्रंप अपनी बात पर कायम रहते हैं और 1 फरवरी से आठ यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाते हैं और फिर 1 जून से इसे बढ़ाकर 25% कर देते हैं, तो यूरोपीय देशों की ओर से जवाबी कार्रवाई लगभग तय है। ऐसे में ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगा जो वैश्विक व्यापार और विकास को प्रभावित करेगा। इस तरह के घटनाक्रम का बाजार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। यह भी संभव है कि ट्रंप पिछली बार की तरह पीछे हट जाएं।