Tejashwi Yadav: तेजस्वी यादव बने RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, सामने खड़ी इन चुनौतियों से कैसे निपटेंगे? - tejashwi yadav appointed rjd national executive president challenges ahead
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय कार्यकारी की आज रविवार को अहम बैठक हुई। इस बैठक में तेजस्वी यादव का सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भोला प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। इसे पास करते हुए पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव के नाम का ऐलान किया। इसके साथ ही राजद में अब तेजस्वी 'युग' की शुरुआत हो गई है। हालांकि तेजस्वी यादव के सामने कई चुनौतियां भी होंगी। सवाल उठ रहा है कि इन चुनौतियों से तेजस्वी यादव कैसे निपटेंगे?
पारिवारिक कलह और विरासत की जंग
तेजस्वी के लिए सबसे पहली और बड़ी चुनौती घर के भीतर का द्वंद्व है। बड़े भाई तेज प्रताप यादव की नाराजगी और रोहिणी आचार्य के बयानों ने अक्सर पार्टी की छवि को प्रभावित किया है। मकर संक्रांति पर तेज प्रताप के निमंत्रण के बावजूद तेजस्वी का भोज में न जाना रिश्तों की कड़वाहट को दर्शाता है। आगामी चुनावों में एनडीए इस मुद्दे को फिर भुना सकता है कि 'जो अपना घर नहीं संभाल सकते, वो राज्य क्या संभालेंगे?'
संगठन को धार देने की चुनौती
राजद के 'युवराज' के सामने अब एक ऐसा संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी है, जो सत्ता पक्ष की खामियों को जनता के बीच प्रभावी ढंग से रख सके। उन्हें पार्टी में युवा जोश और अनुभवी राजनेताओं के बीच संतुलन बिठाना होगा। एक मजबूत विपक्ष के रूप में जनता का भरोसा जीतना उनके लिए परीक्षा की घड़ी है।
दरकते 'M-Y' समीकरण को बचाने की चुनौती
लालू यादव ने जिस मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण के दम पर 15 साल राज किया, उसमें अब सेंध लग चुकी है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बिहार में अपनी पैठ बनाकर राजद के वोट बैंक में बिखराव पैदा कर दिया है। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले इस बिखराव को रोकना तेजस्वी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
गठबंधन और कांग्रेस का साथ बचाने की चुनौती
महागठबंधन में शामिल कांग्रेस को साथ जोड़े रखना भी तेजस्वी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। कांग्रेस के कई विधायक दिल्ली दरबार में राजद से अलग होकर चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि अभी कांग्रेस की ओर से इस पर कोई फैसला नहीं गया गया है। हालांकि यही तेजस्वी की कूटनीति की असली परीक्षा होगी।