टीईटी :संसद सत्र में ठोस निर्णय की उम्मीद, नहीं तो फिर आंदोलन, टीएफआई को आश्वासन दे चुके हैं शिक्षामंत्री - Tet: Hope For A Concrete Decision In The Parliament Session, Otherwise Agitation Will Resume

टीईटी :संसद सत्र में ठोस निर्णय की उम्मीद, नहीं तो फिर आंदोलन, टीएफआई को आश्वासन दे चुके हैं शिक्षामंत्री - Tet: Hope For A Concrete Decision In The Parliament Session, Otherwise Agitation Will Resume

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देश और प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय आने की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षक संगठनों को शिक्षा मंत्रालय की ओर से शुरू की गई पहल से राहत की आशा है। साथ ही, संसद के आगामी सत्र में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन विधेयक लाए जाने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 सितंबर 2025 से देशभर के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के आदेश के बाद से शिक्षक संगठन आंदोलनरत हैं। इसी क्रम में एक दर्जन राज्यों के शिक्षक संगठनों ने मिलकर टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) का गठन किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी, जिन्होंने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। विज्ञापन विज्ञापन

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शिक्षक संगठनों के दबाव के चलते शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों से शिक्षकों से जुड़ी जानकारी मांगी है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि मंत्रालय की इस पहल से उम्मीद है कि बजट सत्र में केंद्र सरकार देशभर के शिक्षकों को राहत देगी। शिक्षा मंत्री ने भी इस दिशा में आश्वासन दिया है।

उन्होंने बताया कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि शिक्षकों के हित में कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो टीएफआई की कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर फरवरी–मार्च में एक बार फिर बड़े आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा। इस बीच संगठन के पदाधिकारी लगातार शिक्षा मंत्री के संपर्क में रहकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं।

जल्द लागू हो कैशलेश चिकित्सा सुविधा

शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणा के चार महीने बाद भी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को अब तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि उच्च अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है। उन्होंने मांग की कि इसे शीघ्र लागू किया जाए, ताकि प्रदेश के लगभग छह लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को इसका लाभ मिल सके।

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