The Bone Temple Movie Review Ralph Fiennes Jack O Connell Alfie Williams Movie Show Fear Power And Faith - Entertainment News: Amar Ujala
Movie Review 28 इयर्स लेटर- द बोन टेम्पल कलाकार जैक ओकोनेल , राल्फ फाइन्स , किलियन मर्फी , एमा लेयर्ड , चि लुईस पैरी और आल्फी विलियम्स लेखक एलेक्स गारलैंड निर्देशक निया डाकोस्टा निर्माता डैनी बॉयल और एलेक्स गारलैंड रिलीज 16 जनवरी 2026 रेटिंग 3/5
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साल 2002 में रिलीज हुई किलियन मर्फी स्टारर ‘28 डेज लेटर’ से शुरू हुई यह फिल्म श्रृंखला अब केवल जॉम्बी या वायरस की कहानी नहीं रही। ‘28 इयर्स लेटर: द बोन टेम्पल’ यह दिखाती है कि समय के साथ डर, सत्ता और आस्था मिलकर इंसान को किस हद तक बदल सकते हैं। यह फिल्म डराने से ज्यादा बेचैन करती है। शुरुआत से ही माहौल भारी रहता है और फिल्म साफ कर देती है कि यहां राहत की उम्मीद न रखें तो बेहतर होगा।
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द बोन टेम्पल फिल्म रिव्यू
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
कहानी वहीं से आगे बढती है जहां पिछली फिल्म खत्म हुई थी। स्पाइक (आल्फी विलियम्स) अब उस छोटे द्वीप से दूर है जहां वह पला बढा था, लेकिन हालात उसे एक खतरनाक पंथ में धकेल देते हैं। इस पंथ का नेता है सर लॉर्ड जिमी क्रिस्टल (जैक ओकोनेल), जो खुद को शैतान का बेटा मानता है और अपने अनुयायियों से बेरहमी की हद तक हत्याएं करवाता है। उसके लिए जो उनका नहीं है, उसे खत्म कर देना ही सही है।
दूसरी ओर डॉक्टर इयान केल्सन (राल्फ फाइन्स) हैं, जो इस उजड़ी हुई दुनिया में मरे लोगों को याद रखने और उन्हें सम्मान देने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान वह एक बेहद ताकतवर और खतरनाक संक्रमित इंसान अल्फा पर भरोसा करने का जोखिम उठाते हैं, इस उम्मीद में कि वायरस के असर को किसी तरह कम किया जा सके।
इसी दुनिया में जिम (किलियन मर्फी) की मौजूदगी कहानी को उसकी शुरुआत से जोड़ती है और यह याद दिलाती है कि यह तबाही कहां से शुरू हुई थी। बोन टेम्पल- यहां सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि इंसानी पागलपन, अंधविश्वास और हिंसा का प्रतीक बन जाता है।
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द बोन टेम्पल फिल्म रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
अभिनय
फिल्म का अभिनय इसका सबसे मजबूत पक्ष है। राल्फ फाइन्स, डॉक्टर केल्सन के रूप में गहराई और इंसानियत लेकर आते हैं। उनका शांत और सधा हुआ अभिनय कई दृश्यों में फिल्म की आत्मा बन जाता है। जिमी क्रिस्टल के किरदार में जैक ओकोनेल डरावने और असहज करते हैं। उनका अभिनय दिखाता है कि सत्ता और आस्था मिलकर इंसान को कितना खतरनाक बना सकती है।
आल्फी विलियम्स का स्पाइक इस बार थोड़ा पीछे रहता है, लेकिन उसकी मौजूदगी कहानी को भावनात्मक आधार देती है। किलियन मर्फी की मौजूदगी पुराने दर्शकों के लिए खास है और फिल्म को भावनात्मक गहराई देती है।
निर्देशन
निर्देशन निया डाकोस्टा का है और उनका तरीका पहले की फिल्मों से अलग है। यहां शोर कम है और खामोशी ज्यादा। कैमरा धीरे-धीरे माहौल बनाता है और डर को पनपने का समय देता है। हिंसा मौजूद है, लेकिन उसे बेवजह नहीं दिखाया गया। फिल्म साबित करती है कि स्टाइल और मतलब दोनों साथ चल सकते हैं।

द बोन टेम्पल फिल्म रिव्यू
- फोटो : सोशल मीडिया
कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी धीमी रफ्तार है। कई जगह कहानी जरूरत से ज्यादा ठहर जाती है, जिससे फिल्म थोड़ी लंबी और भारी लगने लगती है। कुछ किरदार रोचक होने के बावजूद पूरी तरह खुलकर सामने नहीं आ पाते। कुछ सीन ऐसे भी ऐसे हैं, जिनका मतलब हर ऑडियंस को तुरंत समझ नहीं आता। यही वजह है कि फिल्म अच्छी होने के बावजूद पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाती।
देखें या नहीं
अगर आप सिर्फ तेज रफ्तार जॉम्बी एक्शन देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपको भारी लग सकती है। लेकिन अगर आपको स्लो और साइलेंट हॉरर फिल्में पसंद हैं तो इसे जरूर देखें। यह आसान फिल्म नहीं है, लेकिन यह इस श्रृंखला की सबसे गहरी और असरदार कड़ी बनकर सामने आती है।