Top Maoist leader Deva surrendered, reward of 50 lakh rs had been announced for his capture माओवादी संगठन के शीर्ष नेता छत्तीसगढ़ के बारसे देवा ने किया आत्मसमर्पण, घोषित था 50 लाख का इनाम, Chhattisgarh Hindi News
नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों को गुरुवार को उस वक्त एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली, जब छत्तीसगढ़ के रहने वाले माओवादी संगठन के शीर्ष नेता बारसे देवा उर्फ सुक्का ने तेलंगाना में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सूत्रों के अनुसार वह फिलहाल तेलंगाना पुलिस की हिरासत में है, हालांकि राज्य पुलिस अधिकारियों ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। बारसे देवा पर 50 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
पुलिस की ओर से एक-दो दिनों के भीतर इस संबंध में औपचारिक घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बारसे देवा छत्तीसगढ़ के ग्राम पुर्वर्थी का निवासी है, यहीं के वांछित नक्सली माडवी हिड़मा को आंध्र प्रदेश पुलिस ने एलुरु सीथारामराजू जिले में मुठभेड़ में मार गिराया था। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा ने बताया- 'संभवतया बारसे देवा तेलंगाना पुलिस के पास है।'
सूत्रों के मुताबिक बारसे देवा ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में आत्मसमर्पण को लेकर लंबे समय तक विचार-विमर्श किया था। अंततः कोठागुडेम जिला पुलिस की निगरानी में उसे तेलंगाना लाया गया, जहां उसने आत्मसमर्पण किया। छत्तीसगढ़ पुलिस सूत्रों ने बताया कि बारसे देवा ने हिड़मा के एनकाउंटर से पहले ही आत्मसमर्पण का निर्णय ले लिया था, लेकिन हिड़मा के मारे जाने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार उसने मध्यस्थों के माध्यम से चारों राज्यों की पुलिस से संपर्क किया और अंततः तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया। सुकमा जिले के पुवर्थी गांव का निवासी बारसे देवा करीब डेढ़ दशक तक हिड़मा के साथ सक्रिय रहा। हिड़मा, पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) की प्रथम बटालियन का कमांडर था, उसके सेंट्रल कमेटी में पदोन्नत होने के बाद उसकी जिम्मेदारियां बारसे देवा को सौंपी गई थीं। बाद में उसे स्टेट मिलिट्री कमीशन की जिम्मेदारी भी दी गई।
दरभा डिविजनल कमेटी सचिव से लेकर प्रथम बटालियन कमांडर तक का सफर तय करने वाले बारसे देवा कई बड़ी माओवादी कार्रवाइयों में शामिल रहा। छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार वह उन कई घातक हमलों में शामिल था, जिनमें CRPF के जवान शहीद हुए थे।
केंद्र सरकार द्वारा ऑपरेशन कगार शुरू किए जाने के बाद लगातार मुठभेड़ों, नेतृत्व के नुकसान, आत्मसमर्पण और हथियार डालने की घटनाओं से माओवादी संगठन की जमीनी इकाइयां बिखर गई हैं। पुलिस का कहना है कि हिड़मा के एनकाउंटर के बाद संगठन में भ्रम की स्थिति बनी, जिसके चलते आत्मसमर्पण को बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इसी क्रम में बारसे देवा ने भी आत्मसमर्पण किया है।
इधर, सिविल लिबर्टीज कमेटी के तेलंगाना अध्यक्ष और महासचिव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मांग की है कि तेलंगाना पुलिस की हिरासत में मौजूद बारसे देवा को तत्काल न्यायालय में पेश किया जाए। उन्होंने दावा किया कि उसके साथ 15 अन्य लोग भी हैं, जिन्हें दो दिन पहले तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा के पास पुलिस ने पकड़ा था।
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