Trade Talks:भारत-ईयू एफटीए पर क्यों अटका है समझौता? कार्बन टैक्स और ड्यूटी कटौती बनी बाधा - Why Is The India-eu Fta Agreement Stuck? Carbon Tax And Duty Cuts Pose Hurdles

Trade Talks:भारत-ईयू एफटीए पर क्यों अटका है समझौता? कार्बन टैक्स और ड्यूटी कटौती बनी बाधा - Why Is The India-eu Fta Agreement Stuck? Carbon Tax And Duty Cuts Pose Hurdles

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भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि दोनों पक्ष शेष विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए लगातार संपर्क में हैं, ताकि इस महीने के अंत में होने वाले उच्चस्तरीय दौरे से पहले प्रगति सुनिश्चित की जा सके। भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का आयोजन 27 जनवरी को किया जाएगा। इससे पहले 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में शीर्ष यूरोपीय नेतृत्व मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होगा।

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पीयूष गोयल ने दो दिवसीय बैठक कर वार्ताओं की समीक्षा की 

हाल ही में वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रुसेल्स में मारोस सेफकोविक (ईयू आयुक्त-व्यापार और आर्थिक सुरक्षा) के साथ दो दिवसीय बैठक कर वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की। इन बैठकों को अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों पक्ष जल्द से जल्द समझौता पूरा करने के इच्छुक हैं।

कार्बन टैक्स और कुछ उत्पादों पर ड्यूटी को लेकर हो रही असहमति

अधिकारी के अनुसार, प्रमुख विवादों में ईयू का कार्बन टैक्स और कुछ उत्पादों पर ड्यूटी में कटौती शामिल है। इसी कड़ी में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रावल 6-7 जनवरी को ब्रुसेल्स में साइबन वेयंड (यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक) से मुलाकात करेंगे।

16 दौर की वार्ताएं हुई पूरी

अब तक 16 दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। भारत कपड़ा और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शून्य-शुल्क पहुंच की मांग कर रहा है। वहीं ईयू ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, वाइन, स्पिरिट्स, मांस और पोल्ट्री पर बड़े ड्यूटी कट्स के साथ मजबूत बौद्धिक संपदा व्यवस्था की मांग कर रहा है।

बता दें कि जून 2022 में भारत और ईयू ने निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेतक (GI) पर अलग समझौते के साथ व्यापक एफटीए वार्ताएं फिर शुरू की थीं। इससे पहले 2013 में बाजार खोलने के स्तर पर मतभेदों के चलते बातचीत ठप हो गई थी।

भारत-ईयू के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-ईयू द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा, जिसमें 75.85 अरब डॉलर का निर्यात और 60.68 अरब डॉलर का आयात शामिल है। ईयू, भारत के लिए सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार है। भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी करीब 17%, जबकि ईयू के कुल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 9% है।

भारत-ईयू व्यापार समझौते की बातचीत 23 नीतिगत क्षेत्र को कवर करती है, जिनमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश, व्यापार उपचार, उत्पत्ति के नियम, कस्टम्स व व्यापार सुविधा, प्रतिस्पर्धा, सरकारी खरीद, विवाद निपटान, बौद्धिक संपदा अधिकार, भौगोलिक संकेतक और सतत विकास शामिल हैं।

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