क्या है UGC की नई गाइडलाइन? जिसे लेकर जनरल कैटेगरी के छात्र ही जातिगत भेदभाव का लगा रहे आरोप, समझिए हर एक बात

क्या है UGC की नई गाइडलाइन? जिसे लेकर जनरल कैटेगरी के छात्र ही जातिगत भेदभाव का लगा रहे आरोप, समझिए हर एक बात

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यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की नई गाइडलाइन 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी कॉलेज, यूनिवर्सिटियों और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में लागू हो गई है. इसके प्रावधान इतने कड़े हैं कि लोगों को लग रहा है कि ऐसे कानून का सही इस्तेमाल तो कम होगा, लेकिन इससे बदला लेने की कार्रवाई ज्यादा होगी.

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Published: January 19, 2026 4:29 PM IST email india.com By Anjali Karmakar email india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us क्या है UGC की नई गाइडलाइन? जिसे लेकर जनरल कैटेगरी के छात्र ही जातिगत भेदभाव का लगा रहे आरोप, समझिए हर एक बात UGC की स्थापना 28 दिसंबर 1953 को हुई थी. इसे 1956 में एक सांविधिक निकाय यानी Statutory Body बनाया गया.

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) देश में हायर एजुकेशन को डेवलप करने का काम करती है. ये यूनिवर्सिटीज को फंड देती है. क्वालिटी एजुकेशन के लिए पैरामीटर्स तय करती है. लेकिन, 13 जनवरी 2026 को UGC ने एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिसे लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों में नई बहस छिड़ गई है.आलोचक और शिक्षाविद UGC की नई गाइडलाइन को जातिगत भेदभाव को बढ़ाने का जरिया मान रहे हैं. आशंका जताई जा रही है कि नई गाइडलाइंस का इस्तेमाल बदले की भावना से किया जा सकता है.

आइए जानते हैं क्या है UGC की नई गाइडलाइन? UGC को ऐसे नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? नई गाइडलाइन के तहत हर कॉलेज या हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट को क्या करना होगा? जनरल कैटेगरी के छात्र इसे जातिगत भेदभाव से क्यों जोड़ रहे हैं? नियमों का पालन नहीं करने पर क्या एक्शन लिया जाएगा:-

क्या है UGC की नई गाइडलाइन?
UGC ने हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (Higher Education Institution) में इक्विटी प्रमोशन रेगुलेशंस 2026 (Equity Promotion Regulations 2026) का ऐलान किया है. नया नियम 2012 के नियमों को रिप्लेस करेगा. साथ में ये नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के ‘इक्विटी और इनक्लूजन’ की जगह लेगा.
UGC के नए रेगुलेशन का मकसद केवल धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, जाति या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना है. खासकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विकलांग व्यक्तियों या इनमें से किसी के खिलाफ और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में स्टेकहोल्डर्स के बीच पूर्ण इक्विटी और इनक्लूजन को बढ़ावा देना है.

UGC को ऐसे नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
नियमों का कनेक्शन रोहित वेमुला से है. रोहित वेमुला हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर थे. उन्होंने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी.मामला जातिगत भेदभाव से जुड़ा था. इस घटना के बाद तमाम कॉलेजों, यूनिवर्सीटीज और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में जातिगत आधार पर हो रहे भेदभाव को लेकर नई बहस छिड़ गई थी. ये आरोप भी लगे कि पिछड़े वर्ग से आने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में प्रताड़ित किया जाता है. रोहित वेमुला के सुसाइड का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. कोर्ट ने वेमुला और पायल तडवी मामलों के आधार पर UGC को 2012 के पुराने नियमों को रिप्लेस करने के लिए नई गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया था. इसका सीधा मकसद यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट का माहौल OBC, SC और ST फ्रेंडली बनाना है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही UGC ने नई गाइडलाइन बनाई है.

UGC की नई गाइडलाइंस के पॉइंट्स?

नई गाइडलाइन के तहत अब इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी को इक्विटी कमिटी बनानी होगी. इसमें SC, ST, OBC, PwD और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे. नई गाइडलाइन में जाति-आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. डिसेबिलिटी को भी डिस्क्रिमिनेशन के आधार में शामिल किया गया है. इन प्रावधानों को लागू करने के लिए हर संस्थान को इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाना होगा. EOC इक्विटी बढ़ाने, काउंसलिंग देने, बाहर की एजेंसियों से तालमेल करने, शिकायत पोर्टल चलाने और इनक्लूजन की पहलों की निगरानी करने का मुख्य केंद्र होगा. अगर कॉलेज में पर्याप्त टीचर्स नहीं हैं, तो ये काम जुड़ी हुई यूनिवर्सिटी करेगी. हर EOC इक्विटी कमिटी के जरिए काम करेगा. कमिटी की अध्यक्षता संस्थान का हेड करेगा. नियमों में ‘इक्विटी स्क्वाड्स’ और ‘इक्विटी एम्बेसडर्स’ भी लाए गए हैं. ये कैंपस की निगरानी करेंगे और संभावित गलतियों की रिपोर्ट करेंगे. 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन सभी के लिए होगी. शिकायतें ऑनलाइन, लिखित या हेल्पलाइन से की जा सकती हैं. अगर शिकायत में शुरू से ही अपराध दिखे तो पुलिस को भेजी जाएगी. शिकायतों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और सख्त डेडलाइन तय की गई हैं. शिकायत मिलने के 24 घंटे में कार्रवाई शुरू हो जाएगी. 60 दिनों में जांच पूरी करनी होगी.

जनरल कैटेगरी के छात्र इसे जातिगत भेदभाव से क्यों जोड़ रहे हैं?

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source ऐसे नियमों के डिजाइन और अमल का ड्यू प्रोसेस, एकेडमिक फ्रीडम और संस्थान की तटस्थता पर गहरा असर पड़ता है. ‘हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में इक्विटी प्रमोशन रेगुलेशंस 2026’ के तहत बने नियम सामान्य जाति (General Caste) के लोगों को साथ भेजदभावपूर्ण रवैया अपनाते हैं. ये पहले से ही मान लिया जाता है कि जनरल कास्ट के लोग जाति की वजह से भेदभाव के शिकार कभी नहीं हो सकते. ये नियम जाति भेदभाव की झूठी शिकायतों पर कोई सजा नहीं देते, जिससे ये बिल्कुल गलत धारणा और बढ़ती है कि SC/ST के किसी व्यक्ति की कोई भी शिकायत सच्ची होती है. सामान्य जाति का कोई व्यक्ति शुरू से ही अपराधी है. इससे ये नियम बेहद सख्त और अन्यायपूर्ण हो जाते हैं. नया फ्रेमवर्क लोगों की धारणा और अनुपालन को तरजीह देता है. दूसरी ओर सुरक्षा, स्पष्टता और सही प्रक्रिया में बड़ी खामियां छोड़ देता है. इससे एकतरफा कार्रवाई को बढ़ावा मिलता है. इससे झूठी शिकायतों से करियर बर्बाद होने का खतरा है. कुछ इसे आरक्षण की तरह एकतरफा पॉलिसी बता रहे हैं. नियमों की सबसे बड़ी कमी ये है कि जानबूझकर झूठी शिकायतों को रोकने का कोई साफ प्रावधान नहीं है. फ्रेमवर्क शिकायत करने वालों को गोपनीयता, तेज जांच और बदले की कार्रवाई से सुरक्षा देने पर बहुत जोर देता है. लेकिन, गलत इस्तेमाल के नतीजों पर पूरी तरह चुप है.

नई गाइडलाइंस नोटिफाई होने के बाद कॉलेजों को क्या करना होगा?

UGC प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 के लिए 15 जनवरी 2026 को नोटिफिकेशन जारी हो चुका है. यानी ये उसी दिन से लागू है. ऐसे में अब से 90 दिन के अंदर सभी यूनिवर्सिटी और एजुकेशन इंस्टीट्यूट को कमिटी बनानी होंगी. इस कमिटी में OBC, SC, ST, महिलाओं और दिव्यांगों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. शिकायत पर 24 घंटे में प्राइमरी कार्रवाई करनी होगी और 15 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी. अब से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर कोई भी स्पष्ट या निहित अनुचित, भेदभावपूर्ण या पक्षपाती व्यवहार UGC के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस के दायरे में आएगा.

अगर कॉलेज नई गाइडलाइन को माने तो?
नियमों का उल्लंघन करने पर UGC उसकी मान्यता ही खत्म कर सकता है. कुछ मामलों में फंड भी रोका जा सकता है.

अगर किसी स्टूडेंट पर शिकायत की गई तो क्या एक्शन लिया जाएगा?
UGC के नए नियमों के तहत जातिगत भेदभाव की शिकायत मिलने पर इक्विटी कमिटी की जांच होगी. संस्थान प्रमुख को रिपोर्ट सौंपेगी. आरोपी छात्र पर संस्थागत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. यानी पहले चेतावनी दी जाएगी. फिर जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में एक्सपेंशन या रिमूवल(निष्कासन) हो सकता है.

कमिटी के फैसलों के खिलाफ अपील करने का मिलेगा ऑप्शन
हां. अगर आप पर एक्शन हुआ है और आप कमिटी के फैसले से असंतुष्ट हैं, तो 30 दिनों में अपील कर सकते हैं. संस्थान सभी शिकायतों का रिकॉर्ड रखेंगे.

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Anjali Karmakar

Anjali Karmakar

अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें

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