Ujjain News:मकर संक्रांति पर पिता-पुत्र दिवस की अनूठी परंपरा, सूर्य-शनि मिलन पर निकली सूर्यदेव की भव्य पालकी - Ujjain News: Father-son Day Tradition On Makar Sankranti As Grand Sun God Procession Marks Sun-shani Reunion

Ujjain News:मकर संक्रांति पर पिता-पुत्र दिवस की अनूठी परंपरा, सूर्य-शनि मिलन पर निकली सूर्यदेव की भव्य पालकी - Ujjain News: Father-son Day Tradition On Makar Sankranti As Grand Sun God Procession Marks Sun-shani Reunion

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मकर संक्रांति के पावन पर्व पर इस वर्ष भी पिता-पुत्र दिवस की अनूठी परंपरा अपने दशम वर्ष में प्रवेश कर गई। 111 बटुक ब्राह्मणों की सहभागिता में डमरू, शंख और ढोल-ताशों की गूंज के साथ सूर्य देव की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर शनि रूपी पुत्र बने बटुक ब्राह्मणों ने सूर्य रूपी पिता का भावपूर्ण स्वागत किया।

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स्कंद पुराण में वर्णित शनि नवग्रह मंदिर की परंपरा के अनुरूप जहां प्रत्येक ग्रह का अपना पृथक भूगर्भ है सूर्य देव के गर्भ से कृष्णा गुरुजी के सान्निध्य में बटुक ब्राह्मणों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की गई। शैलेंद्र त्रिवेदी (शनि मंदिर पुजारी), राकेश गुरु एवं जीतू गुरु (शनि मंदिर प्रधान) के मार्गदर्शन में सूर्यदेव को पालकी में विराजित किया गया। पालकी के साथ बटुक ब्राह्मण विभिन्न ग्रहों की ध्वजाएं लेकर चल रहे थे, जबकि आगे-आगे शंख-डमरू-ताशों की गूंज वातावरण को पिता-पुत्र प्रेम के संदेश से भर रही थी। विज्ञापन विज्ञापन

त्रिवेणी संगम पर सूर्यदेव का विशेष अर्चन किया गया। आदित्य हृदय स्रोत के पाठ और जय सूर्यदेव के जयकारों के बीच शनि मकर राशि के गर्भगृह में सूर्यदेव की प्रतिमा विधिवत विराजित की गई। शनि-सूर्य मंत्रोच्चार के साथ एक वर्ष बाद पिता-पुत्र मिलन का भावपूर्ण दृश्य उपस्थित हुआ।

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आयोजक कृष्णा गुरुजी ने बताया कि प्रत्येक त्योहार अपने साथ विशेष सामाजिक-आध्यात्मिक संदेश लाता है। कैलेंडर वर्ष 2026 का प्रथम पर्व मकर संक्रांति आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पिता-पुत्र प्रेम का संदेश देती है। जैसे सूर्य और शनि ज्योतिष में शत्रु माने जाते हुए भी एक-दूसरे के घर जाना नहीं छोड़ते, वैसे ही समाज में पिता-पुत्र यदि किसी कटुता से गुजर रहे हों तो उसे भुलाकर साथ समय बिताएं, पिता के चरण वंदन करें और उनका आशीर्वाद लें।

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि हमारे रिश्तों में भी सभी ग्रहों का समावेश है। ग्रह को जानना हो तो गृह को पहचानिए- सूर्य पिता, चंद्र माता, मंगल भाई-बहन, बुध मामा, गुरु पति-बच्चे, शुक्र पत्नी और शनि अधीनस्थ कर्मी का प्रतीक हैं। पृथ्वी पर माता-पिता ही विधाता की सजीव पहचान हैं। कार्यक्रम में बटुक ब्राह्मणों ने अपने पिता का पाद-पूजन किया। अंत में शनि-सूर्य नवग्रह मंत्रों के साथ हवन संपन्न हुआ तथा भंडारे का आयोजन भी किया गया।

मकर संक्रांति का गहन आध्यात्मिक महत्व भी है। इस दिन—

* भगवान सूर्य का अपने पुत्र शनिदेव से मिलन हुआ।
* गंगा नदी का सागर से संगम हुआ।
* भगवान विष्णु ने असुरों पर विजय प्राप्त की।
* राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया।
* महाभारत के भीष्म पितामह ने देह त्याग किया।

कार्यक्रम में देश-विदेश से श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। उपस्थित प्रमुखजनों में कृष्णा गुरुजी, सोशल वेलफेयर सोसाइटी के राकेश बजाज, योगेश बजाज, संजय अग्रवाल, महंत अमर भारती, प्रणय मिश्र, राजेंद्र शर्मा, अनिल कुमार, भारती मंडलोई सहित उज्जैन, इंदौर एवं भोपाल से बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

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