Up:परिवहन विभाग के अफसरों की शह पर निजी एजेंसी बेलगाम, 15 डीएल कर्मियों को निकाला बाहर - Up: Private Agency Runs Amok With The Support Of Transport Department Officials, 15 Dl Employees Expelled

Up:परिवहन विभाग के अफसरों की शह पर निजी एजेंसी बेलगाम, 15 डीएल कर्मियों को निकाला बाहर - Up: Private Agency Runs Amok With The Support Of Transport Department Officials, 15 Dl Employees Expelled

विस्तार Follow Us

परिवहन विभाग के अफसरों की शह पर डीएल प्रिंटिंग व डिलीवरी का काम करने वाली निजी एजेंसी बेलगाम हो गई है। 15 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बाहर निकालने की न वजह बताई, न ही उनसे कोई बातचीत की गई। इतना ही नहीं ऐसे कर्मचारियों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजरों पर पैसा मांगने का आरोप लगाया है।

और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

मामला परिवहन विभाग से जुड़ा है। डीएल प्रिंटिंग व डिलीवरी का काम प्रदेशभर में तीन एजेंसियां सिल्वर टच, फोकॉम नेट व रोजमार्टा को मिला है। इसमें फोकॉम नेट के पास कानपुर व आगरा जोन के 25 जिले हैं। इसमें 120 प्राइवेटकर्मी काम करते हैं। प्राइवेटकर्मियों ने परिवहन मंत्री को शिकायत भेजकर बताया कि उनसे तनख्वाह के पैसे एडवांस मांगे जा रहे हैं। एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर तुषार गर्ग व सुभाष गिरी सैलरी के पैसे मांग रहे हैं, जिसे बाद में कंपनी की ओर से उन्हें खातों में दिया जाएगा। आगरा जोन के कई कर्मियों ने ऐसा किया भी है। इतना ही नहीं डीएल संबंधित कामकाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले कम्प्यूटर व वेबकैम कर्मियों से ही खरीदवाए गए तथा उनका बिल कंपनी के नाम बनवाने का दबाव डाला जा रहा है। विज्ञापन विज्ञापन

ये भी पढ़ें - दो दिन बाद प्रदेश में फिर से लौटी सर्दी, पश्चिम-तराई के इलाकों को लेकर जारी हुई चेतावनी; ये जिले रहे सबसे ठंडे

ये भी पढ़ें- अयोध्या राम मंदिर आ सकते हैं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, 2016 में किए थे हनुमानगढ़ी के दर्शन; ये है कार्यक्रम


मामले की शिकायत के बाद पंद्रह कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया। शिकायत है कि उनसे किसी प्रकार की पूछताछ नहीं की गई। परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से ऐसा किया जा रहा है। अब उनके पास परिवहन आयुक्त कार्यालय में धरना देने के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं रहा है।

यहां के कर्मियों को कर दिया बाहर
सूत्र बताते हैं कि जिन प्राइवेट कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उनमें हाथरस, कौशांबी, कानपुर नगर, हमीरपुर, मैनपुर, इटावा, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, प्रयागराज, फिरोजाबाद, उरई आदि जगहों पर तैनात 15 प्राइवेट कर्मियों को बाहर निकाल दिया गया है। इन कर्मचारियों ने एक से दो हफ्ते ही काम किया था। निकाले जाने वाले कर्मियों में विवेक, मुनेंद्र, अंकित, अभिषेक, अर्जुन, मयंक, कैलाश, मो. सारिक, राहुल के नाम बताए जा रहे हैं।

पहले दी तैनाती, फिर कर दिया बाहर

गौरव आनंद ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर शिकायत की है कि उन्हें फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से हाथरस में एआरटीओ में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनाती दी गई। उन्होंने नौकरी ज्वॉइन की तथा उनकी आईडी भी बनाई गई। लेकिन महज हफ्तेभर बाद उन्हें बाहर कर दिया गया। ऐसे ही इटावा के रहने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि उनका स्थानांतरण इटावा से उरई कर दिया। पांच दिन बाद उरई से हटाकर ललितपुर कर दिया गया। तीन दिन बाद महोबा भेज दिया गया। लेकिन वहां यह कहकर लौटा दिया गया कि पर्याप्त कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि प्राइवेटकर्मियों से भर्ती के नाम पर वसूली भी की गई है।

परिवहन आयुक्त ने की पड़ताल

अमर उजाला लखनऊ संस्करण में सोमवार को ''कर्मचारियों से ही वसूली जा रही उनकी पगार'' शीर्षक खबर प्रकाशित की गई। इसके बाद परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने तत्परता दिखाते हुए अपर परिवहन आयुक्त आईटी सुनीता वर्मा से मामले को लेकर बातचीत की है। सूत्र बताते हैं कि निजी कंपनियों के मालिकों से भी पूछताछ होगी तथा प्रोजेक्ट मैनेजर हटाए जा सकते हैं।

इसलिए बेलगाम हैं निजी कंपनियों के मैनेजर

प्रदेश में डीएल का कामकाज देखने वाली निजी कंपनियों के प्रतिनिधि बेलगाम हैं और परिवहन विभाग के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि प्राइवेट कर्मियों से भर्ती के नाम पर खूब वसूली हुई है। इसका एक हिस्सा अफसरों व प्रोजेक्ट मैनेजरों के जरिए कंपनियों के मालिकों तक पहुंचा है। यही वजह है कि शिकायतों के बाद भी अफसर मौने साधे हुए हैं।

View Original Source