Up News:झांसी रिश्वतकांड से खुल रहीं विभागीय सेटलमेंट की परतें, तीन अफसरों के नाम आने से महकमे में हड़कंप - Jhansi Bribery Scandal Revealing Layers Of Departmental Settlements Three Officers Name Surfaced

Up News:झांसी रिश्वतकांड से खुल रहीं विभागीय सेटलमेंट की परतें, तीन अफसरों के नाम आने से महकमे में हड़कंप - Jhansi Bribery Scandal Revealing Layers Of Departmental Settlements Three Officers Name Surfaced

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यूपी के झांसी में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के असिस्टेंट कमिश्नर और दो अन्य अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की रिश्वत के आरोपों का सीबीआई द्वारा भंडाफोड़ करने के बाद विभाग में लंबे समय से पनप रहे कथित भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है। सीबीआई की कार्रवाई से साफ है कि यह जांच सिर्फ कुछ नामों तक सीमित नहीं रहने वाली। सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे परतें खुलेंगी वैसे-वैसे केंद्रीय जीएसटी के भीतर चल रहे कथित सेटलमेंट नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आएगी।

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इस कार्रवाई की जद में कानपुर के वरिष्ठ अधिकारी सहित तीन अन्य अफसरों के नाम आने से महकमे में हड़कंप की स्थिति है। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला सिर्फ एक ट्रैप या अचानक हुई कार्रवाई का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे विभाग के भीतर से ही निकली जानकारी निर्णायक साबित हुई।  विज्ञापन विज्ञापन

सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह किसी असंतुष्ट मुखबिर की बेरुखी थी या फिर सिस्टम के भीतर बैठे किसी ऐसे विभीषण की भूमिका जिसे मोटी डील से बाहर कर दिया गया? बताया जा रहा है कि झांसी डिवीजन में करोड़ों रुपये के कथित सेटलमेंट और लेनदेन की सटीक सूचना सीबीआई को मिलने के पीछे विभाग के मुखबिरों की भूमिका अहम रही है।

सेटलमेंट के खेल में होती है मोटी कमाई

केंद्रीय जीएसटी में मुखबिरों की एक समानांतर व्यवस्था लंबे समय से सक्रिय है जहां कर चोरी और सेटलमेंट की सूचनाएं दी जाती हैं। नियमों के मुताबिक सही सूचना देने पर मुखबिरों को सीक्रेट फंड से इनाम देने का प्रावधान है लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह राशि बेहद कम होती है। यही वजह है कि कई मुखबिर आधिकारिक इनाम की जगह सेटलमेंट के रास्ते को तरजीह देते हैं। इसमें विभागीय अफसरों और मुखबिर दोनों की मोटी कमाई होती है। झांसी मामले में भी सूत्रों का दावा है कि करोड़ों रुपये की कथित डील हुई लेकिन मुखबिर को उसका अपेक्षित हिस्सा नहीं मिला। इसी असंतोष के चलते मुखबिर ने यूटर्न लिया और पूरी जानकारी बाहर आ गई।

बड़ी डील से बाहर किए गए अफसरों की नाराजगी से टूटी गोपनीयता

इस पूरे घटनाक्रम में विभाग के दो ऐसे अधिकारियों की भूमिका सामने आ रही है जिन्हें शुरुआत में इस कथित सेटलमेंट का हिस्सा बनाया गया था लेकिन बाद में बाहर कर दिया गया। बड़ी डील से बाहर होने की नाराजगी ने पूरे सिंडिकेट की गोपनीयता तोड़ दी और मामला सीधे सीबीआई तक पहुंच गया। झांसी रिश्वत कांड केंद्रीय जीएसटी में पहला मामला नहीं है। 

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से सीजीएसटी अधिकारियों पर रिश्वत, सेटलमेंट और कर चोरी को नजरअंदाज करने के आरोप लगते रहे हैं। कहीं ट्रैप के जरिये अफसर पकड़े गए तो कहीं विभागीय जांच और सीबीआई की कार्रवाई हुई। कानपुर में ही सीजीएसटी कमिश्नर संसारचंद को घूस लेते पकड़े गया था। उनके साथ कई अन्य अधिकारी भी फंसे थे।

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