Up:ताजमहल की वो रातें...जब मीनारों के साए में पूरी रात गूंजती थीं कव्वालियां, ये बात पांच दशक पहले की है - Taj Mahal Stayed Awake All Night Qawwalis Once Echoed Under The Minarets

Up:ताजमहल की वो रातें...जब मीनारों के साए में पूरी रात गूंजती थीं कव्वालियां, ये बात पांच दशक पहले की है - Taj Mahal Stayed Awake All Night Qawwalis Once Echoed Under The Minarets

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मुगल बादशाह शाहजहां के 371वें उर्स की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वक्त के साथ उर्स का स्वरूप भी बदला है। एक दौर ऐसा था जब रात में मकबरे के संगमरमरी चबूतरे पर मीनारों के साए में सुरों की महफिल सजती थी। मुमताज और शाहजहां की कब्र के सामने रातभर कव्वालियां गूंजती थीं। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं


 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की वर्ष 1984 में हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से ताजमहल को रात में पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया। करीब 20 साल तक यह प्रतिबंध लागू रहा। फिर 2004 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसे रात में देखने की अनुमति दी। पूर्णिमा पर सीमित संख्या में पर्यटक इसे रात 12 बजे तक देख सकते हैं। इस बार उर्स 15 से 17 जनवरी तक होगा।



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उर्स कमेटी के अध्यक्ष इब्राहिम हुसैन जैदी ने बताया कि उर्स की परंपरा मुगल बादशाह के समय से चली आ रही है। पांच दशक पहले तक उर्स में ताजमहल रातभर खुलता था। मेहमानखाने की तरफ मीनार के पास मंच सजता था। रात में कव्वाली, मुशायरा और सूफी कलाम पेश किए जाते थे। उर्स कमेटी के आरिफ तैमूरी ने बताया कि संगमरमरी ताजमहल के सामने जब सूफी कलाम गूंजते थे तो रूहानी एहसास पैदा होता था। यह सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि शाहजहां के लिए खिराज ए अकीदत माना जाता था।

 

रात में खोलने की उठ रही मांग

ताजमहल को पर्यटकों के देखने के लिए रात में खोले जाने की मांग लगातार उठ रही है। केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने रात में कृत्रिम रोशनी में ताजमहल को खोले जाने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्री को पत्र लिखा था। इसके लिए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने भी पत्र भेजा। इस संबंध में केंद्र सरकार को निर्णय लेना है।


 

ये होंगे कार्यक्रम

- 15 जनवरी को गुस्ल की रस्म। कब्रों कोे गुलाब जल और केवड़े से नहलाया जाएगा।

- 16 जनवरी को संदल की रस्म। कब्रों पर चंदन का लेप और फातिहा पढ़ने की रस्म।
- 17 जनवरी को चादरपोशी। इस बार उर्स पर 1720 मीटर लंबी सतरंगी चादर चढ़ेगी।
 

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