उत्तर प्रदेश बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी का केंद्र, दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होंगे-up will become green hydrogen technology hub yogi adityanath lucknow news latest update
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए एक एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप्स को मजबूत करने जा रही है। इसके लिए प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच साल तक आर्थिक मदद दी जाएगी। इस तरह सरकार का मकसद ग्रीन हाइड्रोजन की लागत कम करना है साथ ही यूपी को देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी सेंटर बनाना है।
योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किये जाएंगे। इनका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीक विकसित करना और लागत को न्यूनतम करना है। दोनों सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे। इसमें होने वाली रिसर्च का उद्देश्य प्रत्यक्ष रूप से इंडस्ट्री की मांग और आवश्यकताओं के अनुरूप स्किल डेवलप करना होगा। सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की सौ प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाएगी, जिससे अत्याधुनिक लैब और परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें। देश को साल 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में यूपी बड़ी और प्रभावी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी का निर्माण केंद्र बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाता जा रहा है। गोरखपुर जिले में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है।
ऐसा अनुमान है कि इस प्लांट के माध्यम से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर उत्तर प्रदेश में कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं। इसी सोच के साथ ग्रीन हाइड्रोजन नीति में स्टार्टअप्स के लिए भी बड़ा प्रोत्साहन रखा गया है। उन्हें 5 साल तक, हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। शर्त यह है कि ये स्टार्टअप्स किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़े हों। इससे जहां एक ओर युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता का अवसर मिलेगा, वहीं उद्योग को नई तकनीक सुलभ होंगी।