US 500% Tariff Threat: बांग्‍लादेश की लग जाएगी बैठे-ब‍िठाए लॉटरी, 500% टैरिफ की तलवार क्‍यों बढ़ा रही भारत का सिरदर्द? - us 500 per cent tariff threat what will happen to indias garment factories if exports to america stop

US 500% Tariff Threat: बांग्‍लादेश की लग जाएगी बैठे-ब‍िठाए लॉटरी, 500% टैरिफ की तलवार क्‍यों बढ़ा रही भारत का सिरदर्द? - us 500 per cent tariff threat what will happen to indias garment factories if exports to america stop
नई दिल्‍ली:

भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री एक बड़े झटके की तैयारी करने लगी है। अमेरिका की ओर से 500% टैरिफ लगाने की धमकी से निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है। इससे फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित होने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि खरीदारों का रुख हाल के हफ्तों में तेजी से बदला है। अगर भारत पर इतने भारी-भरकम टैरिफ लगते हैं तो यह उसके लिए बैठे-बैठाए लॉटरी लगने जैसा होगा। बांग्लादेश को कीमत और प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर सीधा फायदा होगा। कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय अग्रवाल ने ईटी को बताया, 'जो खरीदार पहले भारत में कुछ ऑर्डर शिफ्ट करने की सोच रहे थे, वे अब आना ही नहीं चाहते। उन्होंने हमें लिखना शुरू कर दिया है, पूछ रहे हैं कि अगर यह 500% टैरिफ लगाया गया तो क्या होगा, गारंटी कौन लेगा?' यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब इंडस्ट्री अभी पिछले अगस्त में अमेरिका की ओर से लगाए गए 50% टैरिफ से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है।

50% टैरिफ ने पहले ही निर्यातकों को मुश्किल में डाल दिया था। उन्हें भारी छूट देनी पड़ी, अपनी खाली पड़ी क्षमता का इस्तेमाल घरेलू ब्रांडों के लिए करना पड़ा और विदेशी ऑर्डर को पड़ोसी देशों के रास्ते भेजना पड़ा। बुधवार को यह अनिश्चितता और बढ़ गई जब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर 500% टैरिफ लगाने के बिल को मंजूरी दे दी है जो रूस के साथ व्यापार जारी रखते हैं।

बांग्‍लादेश की न‍िकल आएगी लॉटरी

500% टैरिफ लगने पर बांग्‍लादेश की लॉटरी लग जाएगी। अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय गारमेंट्स अचानक महंगे हो जाएंगे। इससे बांग्लादेश को कीमत और प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर सीधा लाभ मिलेगा। गारमेंट सेक्टर बेहद कम मार्जिन पर काम करता है। ऐसे में अमेरिकी रिटेलर्स भारत के विकल्प के रूप में बांग्लादेश की ओर रुख करेंगे। वहां लेबर कॉस्ट पहले से ही कम है। टैरिफ का बोझ भी नहीं होगा। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को अपनी सप्लाई चेन भारत से हटाकर बांग्लादेश ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करेगी। इससे बांग्लादेशी निर्यातकों को भारत के हिस्से वाला ग्लोबल मार्केट शेयर हथियाने का एक ऐतिहासिक अवसर मिल जाएगा।

भारत के ल‍िए अमेरि‍का सबसे बड़ा मार्केट

अमेरिका भारत के लिए कपड़ों और टेक्सटाइल का सबसे बड़ा बाजार है। भारत के कुल निर्यात का 28-30% हिस्सा अमेरिका को जाता है। 2024-25 में भारत ने 37 अरब डॉलर के कपड़े और टेक्सटाइल का निर्यात किया। 50% टैरिफ लगने के बाद से इस सेक्टर को स्थिर होने में काफी परेशानी हो रही है।

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच कपड़ों का निर्यात सिर्फ 2.28% बढ़ा, जबकि टेक्सटाइल निर्यात में 2.27% की गिरावट आई। इन जोखिमों के बावजूद निर्माता कहते हैं कि उत्पादन रोकना कोई विकल्प नहीं है। अग्रवाल ने कहा, 'अमेरिका के टैरिफ को लेकर स्थिति अभी भी बहुत अनिश्चित है। लेकिन, हमें माल तो बनाना ही होगा। हमें यह जोखिम उठाना ही पड़ेगा।'

500% टैर‍िफ के गंभीर होंगे नतीजे

कुछ कंपनियों ने निर्यात जारी रखने के लिए पहले ही नुकसान झेल लिया है। करीब 8,000 लोगों को रोजगार देने वाली कोलकाता की राजलक्ष्मी कॉटन मिल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर रजत जयपुरिया ने बताया, 'हमने निर्यात जारी रखने के लिए भारी छूट दी, इस उम्मीद में कि यह समस्या जल्द ही हल हो जाएगी।' उनकी कंपनी ने अब फॉल सीजन के लिए उत्पादन शुरू कर दिया है। लेकिन, जयपुरिया ने चेतावनी दी कि अगर प्रस्तावित टैरिफ लागू हुए तो गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, 'हमने अब फॉल सीजन के ऑर्डर के लिए उत्पादन शुरू कर दिया है। हालांकि, 500% टैरिफ प्रभावी रूप से एक प्रतिबंध जैसा होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'हमें समझ नहीं आ रहा कि अगर अमेरिका को निर्यात बंद हो गया तो फैक्ट्रियां कैसे चलती रहेंगी।'

आने वाले सीजन के लिए अमेरिकी खरीदार पहले से ही भारत के अलावा अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि तिरुप्पुर में तनाव के संकेत दिख रहे हैं। तिरुप्पुर भारत के निटवेअर निर्यात का लगभग 90% हिस्सा देता है। यह इस बात को दिखाता है कि सप्लाई चेन पर कितना दबाव बन रहा है। यह स्थिति भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रही है, जो पहले से ही आर्थिक दबावों से जूझ रही है। अमेरिका के साथ व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह के टैरिफ का असर सिर्फ इंडस्ट्री पर ही नहीं, बल्कि लाखों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर भी पड़ सकता है। इंडस्ट्री के विशेषज्ञ इस मामले पर सरकार से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं ताकि इस संकट से निपटा जा सके।

View Original Source