Vehicle Pollution:क्या बिना इंजन बदले 90% कम हो सकता है प्रदूषण? जानिए क्या हैं ड्रॉप-इन फ्यूल्स और Hvo100? - Can Vehicle Pollution Drop By 90% Without Changing Engines? Explained: Drop-in Fuels And Hvo100
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जब भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर से होने वाले प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों की बात होती है तो अक्सर एक ही चर्चा सामने आती है। क्या हमें गाड़ियां बदलनी चाहिए या ईंधन? विशेषज्ञों का मानना है कि CO₂ उत्सर्जन को कम करने का सबसे तेज तरीका इंजन की तकनीक बदलना नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाला ईंधन बदलना है। एक नई गाड़ी के मॉडल को तैयार करने में कई साल लगते हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल इंजन के विकल्प जैसे इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन पर अभी भी बहस जारी है कि लंबे समय में क्या बेहतर होगा। इस बदलाव में दशकों लग सकते हैं। लेकिन 'ड्रॉप-इन फ्यूल्स' इसका एक सीधा और आसान समाधान लेकर आए हैं।
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क्या हैं ड्रॉप-इन फ्यूल्स?
इन्हें 'ड्रॉप-इन फ्यूल' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन्हें इस्तेमाल करने के लिए कार के इंजन में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती। आप अपनी मौजूदा पेट्रोल या डीजल गाड़ी में इनका इस्तेमाल बिना किसी नुकसान के कर सकते हैं। अब दुनिया भर में ऐसे ईंधन विकसित करने में रुचि बढ़ रही है जो स्पार्क-इग्निशन और ऑयल-बर्नर इंजन के लिए 100% जीवाश्म-मुक्त हों। कई बड़ी कार निर्माता कंपनियों ने अब अपनी गाड़ियों में इनके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।
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HVO100: डीजल का बेहतरीन विकल्प
इस समय सबसे ज्यादा चर्चा HVO100 की हो रही है। HVO का मतलब है 'हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल' (हाइड्रोजेनेटेड वेजिनिल ऑयल)। इसे 'रिन्यूएबल डीजल' भी कहा जाता है।
बायोडीजल से कैसे अलग है?
सामान्य बायोडीजल फैटी एसिड मिथाइल एस्टर (FAME) से बनता है, जो इंजन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं होता इसलिए इसे कम मात्रा (लगभग 7%) में मिलाया जाता है।
HVO की खूबी: HVO100 एक हाइड्रोकार्बन ईंधन है जो पारंपरिक डीजल के जैसा ही होता है इसलिए यह इंजन के लिए सुरक्षित है। पिछले साल, Stellantis कंपनी ने अपने डीजल इंजन रेंज (यूरो 5 और यूरो 6) को HVO के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से मान्य घोषित किया था।
BMW ने उठाया बड़ा कदम
अक्तूबर में बीएमडब्लू ने फ्लीट ऑपरेटर्स को दिखाया कि कैसे वे इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के साथ-साथ कार्बन-न्यूट्रल ईंधन का उपयोग करके अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम कर सकते हैं। यूरोप में लगभग 25 करोड़ गाड़ियां हैं अगर इनमें रिन्यूएबल ईंधन का इस्तेमाल बढ़ जाए, तो प्रदूषण में भारी कमी आ सकती है।