Vehicles Stranded On The Approach Road To The Pontoon Bridge. - Agra News
दूसरे दिन भी जलमग्न रहा कैंजराघाट, नहीं हुआ समस्या का समाधान
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बाह। मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना के उद्योतगढ़ गांव एवं उत्तर प्रदेश के बाह, आगरा के कैंजरा गांव के बीच चंबल नदी पर बने पांटून पुल का पहुंच मार्ग बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी जलमग्न रहा। जलमग्न पहुंच मार्ग पर कारों समेत कई वाहन फंस गए। इन वाहनों को ट्रैक्टर से रस्सा बांधकर बाहर निकाला गया। समस्या का निदान न होने के कारण पांटून पुल से होकर यात्रा करने वालों में रोष व्याप्त है।
नियमानुसार, कैंजराघाट का पांटून पुल 15 अक्टूबर को बनना था। पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग से देरी से अनुमति ली। इस वजह से बीते बुधवार को पांटून पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के साथ आवागमन शुरू हुआ। बुधवार दोपहर चंबल नदी का जलस्तर महज एक फीट बढ़ने से पुल का पहुंच मार्ग डूब गया। कीचड़ और दलदल के हालात पैदा हो गये थे। भिंड और मुरैना, आगरा, फिरोजाबाद के 150 गांवों के लोग कैंजरा घाट के पांटून पुल पर आश्रित हैं। पहुंच मार्ग डूबने से बृहस्पतिवार को दूसरे दिन कई वाहन फंस गए। उन्हें ट्रैक्टर से रस्सा बांधकर बाहर निकाला गया। ट्रैक्टर ट्रॉली से जलमग्न पहुंच मार्ग से गुजरते समय हादसे का खतरा भी बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही पुल से गुजरने वाले यात्रियों पर भारी पड़ सकती है। सिलावली के राकेश सिंह, अजय सिंह, निरोत्तम सिंह, नगरा के आनंद सिंह, रिषी तोमर, आकाश सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। पहले से पहुंच मार्ग को दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? महज एक फीट पानी बढ़ने पर ये हालात हैं, तो बारिश के दिनों में क्या होगा? पांटून पुल के निर्माण में बरती गई लापरवाही पर रोष व्यक्त कर समस्या के समाधान की मांग की है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार चंद्रसेन तिवारी ने बताया नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से दिक्कत हुई है, पहुंच मार्ग पर मिट्टी डलवा कर दुरुस्त कराया जाएगा। लोहे की चादर बिछाई जाएगी, जिससे वाहन फंसने का खतरा न रहे।
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मगरमच्छ के हमले का डर
भिंड और मुरैना के लोग 60-90 किमी की दूरी बचाने के चक्कर में कैंजराघाट के पांटून पुल के डूबे पहुंच मार्ग से मगरमच्छ के हमले के डर के बीच निकलने का जोखिम उठा रहे हैं। उदी और धौलपुर के रास्ते से आने जाने में 60-90 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करने में धन और समय की बर्बादी से बचने के लिए डूबे पहुंच मार्ग पर बाइक और पैदल निकल रहे हैं। कैंजराघाट के आस पास बड़ी तादाद में मगरमच्छ और घड़ियाल दिखते हैं। ऐसे में नदी के बहते पानी से पुल तक पहुंचने को निकलते समय मगरमच्छ ने हमला कर दिया, तो जान खतरे में पड़ जाएगी। सिलावली की सीमा एवं नगरा के देवेन्द्र ने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही की वजह से लोग जान जोखिम में डालने को मजबूर हुए हैं।

कैंजराघाट: पांटून पुल के पहुंच मार्ग पर फंसी कार को ट्रैक्टर से खींच कर निकाला गया

कैंजराघाट: पांटून पुल के पहुंच मार्ग पर फंसी कार को ट्रैक्टर से खींच कर निकाला गया

कैंजराघाट: पांटून पुल के पहुंच मार्ग पर फंसी कार को ट्रैक्टर से खींच कर निकाला गया

कैंजराघाट: पांटून पुल के पहुंच मार्ग पर फंसी कार को ट्रैक्टर से खींच कर निकाला गया